टैक्स कलेक्शन बढ़ाने की सरकारी चाल
Budget 2026 में इस छह महीने की फॉरेन एसेट डिस्क्लोजर स्कीम का आना, सरकार की टैक्स कलेक्शन को बढ़ाने और विदेशों में मौजूद अघोषित संपत्ति को मुख्यधारा में लाने की एक पुरानी रणनीति को दर्शाता है। हालांकि इसे छोटे टैक्सपेयर्स के लिए राहत बताया जा रहा है, लेकिन इसका मुख्य मकसद सरकारी खजाने को मजबूत करना है। पहले भी ऐसी 'Amnesty Scheme' से सरकार को मोटा रेवेन्यू मिला है। उदाहरण के लिए, Income Declaration Scheme (IDS) 2016 से लगभग ₹65,250 करोड़ घोषित किए गए थे। यह नई स्कीम, मौजूदा Black Money Act जैसे कड़े कानूनों की तुलना में कम दंडनीय रास्ता पेश करती है, ताकि लोग सख्त कार्रवाई से पहले स्वेच्छा से अपनी जानकारी दें।
कैटेगरी A और B: क्या है भुगतान का तरीका?
FAST-DS 2026 स्कीम दो अलग-अलग कैटेगरी में काम करेगी:
- कैटेगरी A: यह उन लोगों के लिए है जिन्होंने अपनी विदेशी संपत्ति या आय को बिल्कुल भी घोषित नहीं किया है, और यह 1 करोड़ रुपये तक सीमित है। ऐसे लोगों को संपत्ति के 31 मार्च 2026 तक के वैल्यू का 60% भुगतान करना होगा। इसमें 30% टैक्स और उस टैक्स का 100% यानी अतिरिक्त 30% अमाउंट शामिल होगा।
- कैटेगरी B: यह उन टैक्सपेयर्स के लिए है जिन्होंने आय तो घोषित की, लेकिन विदेश में खरीदी गई संपत्ति को रिपोर्ट करना भूल गए। यह स्कीम 5 करोड़ रुपये प्रति एसेट तक के लिए लागू होगी। ऐसे लोग हर संपत्ति के लिए केवल ₹1 लाख की एक फिक्स्ड फीस भरकर अपनी पोजीशन रेगुलराइज़ कर सकते हैं। यह फीस केवल पहले साल के गैर-घोषणा के लिए लागू होगी।
क्या मिलेगा फायदा और न करने पर क्या होगा?
इस स्कीम में हिस्सा लेने वालों को Black Money (Prohibitive and Imposition of Tax) Act, 2015 के तहत किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई से छूट मिलेगी, बशर्ते वे तय समय सीमा के भीतर अपनी संपत्ति घोषित कर दें और पूरा भुगतान कर दें। सरकार द्वारा अधिसूचित की जाने वाली इस छह महीने की अवधि में, लोग पिछली रिपोर्टिंग या टैक्स संबंधी चूक से छुटकारा पा सकते हैं।
लेकिन, इस मौके को गंवाने वालों पर भारी पड़ सकता है। स्कीम की मियाद खत्म होने के बाद, गैर-अनुपालन करने वालों पर गंभीर परिणाम होंगे। इनमें अघोषित आय पर 30% टैक्स, टैक्स के 300% तक के भारी जुर्माने, हर संपत्ति पर ₹10 लाख का सालाना गैर-घोषणा फाइन, और 6 महीने से लेकर 7 साल तक की जेल की सजा शामिल हो सकती है। साथ ही, असेसमेंट 16 साल तक के लिए फिर से खोले जा सकते हैं, जिससे डबल टैक्स अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) का फायदा भी नहीं मिलेगा।
ग्लोबल ट्रेंड्स और सरकारी रणनीति
यह स्कीम OECD के कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड (CRS) जैसी पहलों से प्रेरित वैश्विक टैक्स पारदर्शिता और क्रॉस-बॉर्डर सूचना आदान-प्रदान की बढ़ती प्रवृत्ति के अनुरूप है। कई देशों ने विदेशों से संपत्ति वापस लाने के लिए ऐसी ही एमनेस्टी प्रोग्राम चलाए हैं। भारत सरकार का इस तरह की योजनाओं का लगातार इस्तेमाल करना, Black Money Act जैसे कानूनों के साथ मिलकर, रेवेन्यू बढ़ाने और टैक्स अनुपालन को बेहतर बनाने की एक सोची-समझी रणनीति को दिखाता है। वित्तीय विशेषज्ञ मानते हैं कि भले ही ऐसी स्कीम से तुरंत राजस्व मिल जाता है, लेकिन टिकाऊ टैक्स संस्कृति को बढ़ावा देने में उनकी असली सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि जो लोग इसका फायदा नहीं उठाते, उन पर कितनी सख्ती से कार्रवाई होती है। 'छोटे टैक्सपेयर्स' पर फोकस करना एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिसका मकसद टैक्स बेस को बढ़ाना और उन लोगों की मदद करना हो सकता है जिन्होंने अनजाने में या कम व्यवस्थित तरीके से विदेशी संपत्ति अर्जित की हो।