बजट 2026-27: ग्रामीण जल-स्वच्छता को मिला बूस्टर, पर अमल पर बड़ा सवाल!

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AuthorNeha Patil|Published at:
बजट 2026-27: ग्रामीण जल-स्वच्छता को मिला बूस्टर, पर अमल पर बड़ा सवाल!
Overview

Union Budget 2026-27 में सरकार ने ग्रामीण जल और स्वच्छता योजनाओं, खासकर Jal Jeevan Mission (JJM) के लिए बड़े आवंटन फिर से शुरू कर दिए हैं। हालांकि, पिछले फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) के रिवाइज्ड एस्टीमेट्स (Revised Estimates) में भारी कटौती और खर्च न होने से इस बार जमीनी हकीकत पर योजनाओं के अमल पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

बजट 2026-27: उम्मीदों का बहाली और हकीकत की चुनौतियाँ

Union Budget 2026-27 की सबसे बड़ी कहानी ग्रामीण भारत के जल और स्वच्छता के इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) से जुड़ी है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने Jal Jeevan Mission (JJM) और Swachh Bharat Mission (Gramin) के लिए भले ही बड़ा फंड जारी किया हो, लेकिन पिछले फाइनेंसियल ईयर की हड़बड़ी में हुए कम खर्च कीThe ghosts of underspending still haunt us. JJM के डायरेक्ट फील्ड एग्जीक्यूशन (Execution) यानी पाइपलाइन बिछाने और घर-घर कनेक्शन देने वाले हिस्से का बजट, 2025-26 के लिए ₹66,770.47 करोड़ के बजट एस्टीमेट (Budget Estimate) से घटकर केवल ₹16,944.44 करोड़ रिवाइज्ड एस्टीमेट्स में रह गया था। इसका मतलब है कि लगभग ₹50,000 करोड़ का खर्च हो ही नहीं पाया। अब 2026-27 के लिए इसे वापस ₹67,363.50 करोड़ करना, योजनाओं में तेजी लाने का साफ संकेत है। पर सवाल यह है कि क्या अब तक इस अमल की राह में जो रुकावटें थीं, वे दूर कर ली गई हैं?

Swachh Bharat Mission का भी यही हाल

Swachh Bharat Mission (Gramin) में भी एक जैसी तस्वीर देखने को मिल रही है। 2025-26 के लिए ₹7,192 करोड़ के शुरुआती बजट एस्टीमेट के बाद, रिवाइज्ड एस्टीमेट्स में यह ₹6,000 करोड़ पर आ गया था। 2026-27 के लिए यह आवंटन फिर से ₹7,192 करोड़ कर दिया गया है। यह इशारा करता है कि अब फोकस बड़े पैमाने पर टॉयलेट (Toilet) बनाने से हटकर, सॉलिड और लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (Waste Management) जैसे ज्यादा जटिल कामों और ओपन डेफिकेशन फ्री (ODF) स्टेटस को बनाए रखने पर होगा। लेकिन पिछले साल का कम खर्च यह दिखाता है कि इन क्षेत्रों में भी प्रगति धीमी रही।

राज्यों के ग्रांट्स (Grants) से रफ्तार की उम्मीद

सेंट्रल गवर्नमेंट (Central Government) का प्रोजेक्ट्स के अमल के लिए राज्यों पर निर्भर होना, ग्रांट्स (Grants) में हुई बड़ी बढ़ोतरी से साफ दिखता है। 2025-26 के रिवाइज्ड एस्टीमेट्स में राज्यों के लिए ₹18,686.02 करोड़ के मुकाबले, 2026-27 के बजट एस्टीमेट में यह ₹63,089.97 करोड़ हो गया है। यूनियन टेरिटरीज (Union Territories) के लिए भी आवंटन ₹678 करोड़ (Revised 2025-26) से बढ़कर ₹2,156 करोड़ (Budget 2026-27) हो गया है। फंड्स का यह भारी इजाफा राज्यों को पैसा पहुंचाकर अमल में तेजी लाने की कोशिश को दिखाता है, जिसमें नॉर्थ-ईस्टर्न (North-Eastern) रीजन के लिए भी अच्छी खासी बढ़ोतरी शामिल है। आखिर में, इन बड़ी योजनाओं की सफलता राज्यों की फंड्स को सही तरीके से इस्तेमाल करने और प्रोजेक्ट्स को एफिशिएंटली (Efficiently) पूरा करने की क्षमता पर टिकी है, जो हमेशा से ही बजटेड (Budgeted) और एक्चुअल (Actual) खर्च के बीच बड़े अंतर का एक बड़ा कारण रही है।

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