US और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमतें **$97** प्रति बैरल के ऊपर निकल गई हैं। सप्लाई चेन में बाधा के डर से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा है और महंगाई का खतरा भी गहरा रहा है।
बाजार पर क्या है असर?
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) में जारी सैन्य संघर्ष ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में हलचल मचा दी है। 2 सितंबर 2026 को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स $97 के स्तर को पार कर गए, जिसके पीछे मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य तनातनी है। यह रास्ता दुनिया के कुल तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) शिपमेंट्स का लगभग 20% हिस्सा संभालता है, इसलिए यहां कोई भी अनिश्चितता सीधे कीमतों में 'रिस्क प्रीमियम' जोड़ देती है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंताएं
भारत अपनी अधिकांश तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए कच्चे तेल के भावों में आई यह तेजी सीधे भारत के आयात बिल को बढ़ाएगी और रुपये में कमजोरी ला सकती है। निफ्टी 50 समेत पूरे मार्केट में निवेशक सतर्क हैं, क्योंकि एनर्जी कॉस्ट बढ़ने से कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर चोट पड़ना तय है।
खासकर एविएशन (Aviation) सेक्टर के लिए स्थिति कठिन है, क्योंकि एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के दाम सीधे क्रूड से जुड़े हैं। इसके अलावा पेंट्स, केमिकल्स और टायर बनाने वाली कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) इन बढ़ी हुई कीमतों का कितना बोझ ग्राहकों पर डालेंगी और कितना खुद सहेंगी।
RBI और मॉनेटरी पॉलिसी
लंबी अवधि तक कच्चे तेल के दाम ऊंचे रहने से देश में महंगाई (Inflation) बढ़ने का खतरा है। अगर ऐसा हुआ, तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी को सख्त रखना पड़ सकता है, जिससे कंपनियों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा और आर्थिक विकास की रफ्तार सुस्त पड़ सकती है। फिलहाल, निवेशक इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग रूट कितने सुरक्षित रहते हैं और इंश्योरेंस व लॉजिस्टिक्स की लागत में कितनी बढ़ोतरी होती है।
