ब्राजील ने एक बड़ा कदम उठाते हुए वर्कवीक को **44 घंटे** से घटाकर **40 घंटे** करने का कानून पास कर दिया है। इससे करीब **3 करोड़** कर्मचारियों को फायदा होगा, लेकिन कंपनियों के लिए ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ सकती है।
ब्राजील की संसद ने एक ऐतिहासिक फैसले में काम के घंटों को कम करने के कानून को मंजूरी दे दी है। सीनेट में 75-1 के भारी बहुमत से पास हुए इस प्रस्ताव का असर लगभग 3 करोड़ कर्मचारियों पर पड़ेगा। सबसे अहम बात यह है कि काम के घंटे घटने के बावजूद कर्मचारियों का वेतन पहले जितना ही रहेगा, जिसका सीधा बोझ अब कंपनियों की जेब पर पड़ेगा।
कंपनियों के लिए क्या है चुनौती?
सरकार ने इसे चरणों में लागू करने का फैसला किया है। शुरुआत में 2 महीने का एडजस्टमेंट पीरियड होगा, उसके बाद वर्कवीक को 42 घंटे किया जाएगा और एक साल के भीतर इसे 40 घंटे पर लाया जाएगा। चूंकि कंपनियों को पूरा वेतन देना ही होगा, इसलिए वे अपनी ऑपरेटिंग कॉस्ट को कैसे मैनेज करती हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।
निवेशकों की चिंता और रिस्क (Investor Perspective)
विशेषज्ञों का मानना है कि लेबर-इंटेंसिव सेक्टर, जैसे कि रिटेल और सर्विस इंडस्ट्री, पर सबसे ज्यादा दबाव रहेगा। अगर कंपनियां अपनी प्रोडक्टिविटी (Productivity) बढ़ाने में नाकाम रहती हैं, तो उनके प्रॉफिट मार्जिन पर चोट पहुंचना तय है।
ऐसी स्थिति में कंपनियों के पास दो ही विकल्प होंगे: या तो वे नई भर्तियां करें जिससे खर्च बढ़ेगा, या फिर कीमतों को बढ़ाकर ग्राहकों पर बोझ डालें, जो महंगाई को बढ़ावा दे सकता है। आगामी तिमाहियों में निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि कंपनियां अपनी वर्कफोर्स को कैसे मैनेज कर रही हैं और क्या वे अपने मौजूदा प्रॉफिट लेवल को बनाए रखने में सक्षम हैं या नहीं।
