Brazil Economy: आर्थिक मोर्चे पर घिरे लुला! कर्ज GDP के **82%** के पार, निवेशकों की बढ़ी चिंता

ECONOMY
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AuthorNeha Patil|Published at:
Brazil Economy: आर्थिक मोर्चे पर घिरे लुला! कर्ज GDP के **82%** के पार, निवेशकों की बढ़ी चिंता

ब्राजील की अर्थव्यवस्था फिलहाल एक कठिन दौर से गुजर रही है। देश का पब्लिक डेट (Public Debt) बढ़कर GDP के **82%** पर पहुंच गया है, जबकि महंगाई **4.6%** के स्तर पर बनी हुई है। राष्ट्रपति लुला की सरकार एक विभाजित विधायिका और बढ़ते वित्तीय दबाव के बीच तालमेल बिठाने की चुनौती का सामना कर रही है।

भारी कर्ज का बोझ और सरकार की सीमाएं

राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लुला डा सिल्वा के कार्यकाल में ब्राजील जटिल आर्थिक स्थिति में फंस गया है। पब्लिक डेट का आंकड़ा GDP के 82% को पार कर चुका है। पिछली सरकार के दौरान इसमें 10% की बढ़ोतरी हुई थी, जिसने सरकार के नए प्रोजेक्ट्स पर खर्च करने के हाथों को बांध दिया है। फेडरल बजट का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही फिक्स्ड खर्चों में बंधा हुआ है, जिससे सरकार के पास कर्ज बढ़ाए बिना कदम उठाने की गुंजाइश बहुत कम है।

महंगाई और केंद्रीय बैंक के बीच तनातनी

देश में महंगाई दर 4.6% है, जो सेंट्रल बैंक के 3% के टारगेट से काफी ऊपर है। महंगाई को कंट्रोल करने के लिए बैंक ने ब्याज दरें बढ़ाई हैं, लेकिन सरकार लगातार कम ब्याज दरों की वकालत कर रही है ताकि इकोनॉमी में रफ्तार बनी रहे। यह टकराव निवेशकों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि खर्च पर लगाम न होने से ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं, जो बिजनेस एक्टिविटी को सुस्त कर सकती हैं।

राजनीतिक गतिरोध का असर

विधायिका में लिबरल पार्टी का दबदबा होने के कारण सरकार के लिए बड़े नीतिगत बदलाव करना मुश्किल हो रहा है। वैल्यू-एडेड टैक्स (VAT) सिस्टम में सुधार की योजना भी इस राजनीतिक गतिरोध के कारण लटकी हुई है। टैक्स नियमों में स्पष्टता न होने से विदेशी और घरेलू निवेशक निवेश को लेकर सतर्क बने हुए हैं।

ग्लोबल मार्केट पर असर

ब्राजील आयरन ओर (Iron Ore), सोयाबीन और कॉफी का प्रमुख उत्पादक है। वहां की आर्थिक अस्थिरता ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों को सीधे प्रभावित कर सकती है। एक प्रमुख इमर्जिंग मार्केट होने के नाते, ब्राजील में होने वाला कोई भी बड़ा बदलाव भारत जैसे देशों में विदेशी निवेशकों के रिस्क परसेप्शन को भी बदल सकता है। आने वाले महीनों में निवेशकों की नजर मुख्य रूप से टैक्स सुधारों और सेंट्रल बैंक की स्वतंत्रता पर रहने वाली है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.