Bond Yields: क्रूड ऑयल के $100 के करीब पहुंचने से बॉन्ड यील्ड में उछाल, बाजार में बढ़ी चिंता

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Bond Yields: क्रूड ऑयल के $100 के करीब पहुंचने से बॉन्ड यील्ड में उछाल, बाजार में बढ़ी चिंता

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों के $100 प्रति बैरल के करीब पहुंचने का असर भारतीय बाजारों पर दिख रहा है। सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 7% के स्तर पर पहुंच गई है, जिससे निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर हुआ है।

बॉन्ड मार्केट पर दबाव

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरी हैं। बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड में तेजी देखी जा रही है, क्योंकि ट्रेडर्स को डर है कि महंगा ईंधन महंगाई (Inflation) को बढ़ा सकता है। इससे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की भविष्य की पॉलिसी पर भी असर पड़ सकता है। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल के दाम बढ़ने से करंट अकाउंट बैलेंस बिगड़ने का जोखिम बढ़ जाता है, जिससे बॉन्ड निवेशकों का रुझान कम हो रहा है।

बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी का सहारा

बाजार में घबराहट के बावजूद बॉन्ड मार्केट में बड़ी गिरावट नहीं देखी गई है। इसका मुख्य कारण बैंकिंग सिस्टम में मौजूद रिकॉर्ड लिक्विडिटी है, जो ₹11 लाख करोड़ से ज्यादा है। बैंकों के पास पर्याप्त कैश होने के कारण वे शॉर्ट-टर्म सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश कर रहे हैं, जो बॉन्ड मार्केट को सहारा दे रहा है।

इक्विटी मार्केट और FPIs का रुख

तेल की बढ़ती कीमतों का असर शेयर बाजार पर भी साफ दिख रहा है। ग्लोबल टेंशन और महंगाई के डर से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने बीते कुछ दिनों में भारतीय बाजार से करीब $1.6 बिलियन की बिकवाली की है।

विशेष रूप से एविएशन, पेंट्स और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर निवेशकों की नजर है। ये सेक्टर कच्चे तेल पर निर्भर हैं, इसलिए तेल की कीमतें बढ़ने से इनके प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ता है। फिलहाल, निवेशक अगली इन्फ्लेशन डेटा और केंद्रीय बैंकों की मीटिंग्स का इंतजार कर रहे हैं, जिससे बाजार में सतर्कता का माहौल है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.