बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी का स्तर **₹10 लाख करोड़** के रिकॉर्ड पार पहुंच गया है। इस भारी भरकम नकदी को खपाने के लिए बॉन्ड मार्केट के जानकारों ने सरकार से शॉर्ट-टर्म डेट जारी करने की अपील की है।
सरकारी बॉरोइंग कैलेंडर के दूसरे छमाही की तैयारी के बीच, बॉन्ड ट्रेडर्स और नीति निर्माताओं के बीच एक अहम बहस छिड़ गई है। बैंकिंग सिस्टम में रिकॉर्ड लिक्विडिटी सरप्लस ₹10 लाख करोड़ को पार कर चुका है। विदेशी मुद्रा के भारी प्रवाह के कारण बैंकों के पास नकदी का अंबार लगा है, और ट्रेजरी मैनेजरों के सामने इस पैसे को सुरक्षित और मुनाफे वाली जगह पर लगाने की चुनौती खड़ी हो गई है।\n\nइस स्थिति से निपटने के लिए मार्केट के जानकारों का सुझाव है कि सरकार को अपने आगामी बॉरोइंग शेड्यूल में शॉर्ट-टर्म डेट इंस्ट्रूमेंट्स की सप्लाई बढ़ानी चाहिए। इससे न केवल अतिरिक्त नकदी को सोखने में मदद मिलेगी, बल्कि 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड्स पर दबाव भी कम होगा, जो पूरी इकोनॉमी के लिए ब्याज दरों का बेंचमार्क माने जाते हैं।\n\nहालांकि, सरकार के लिए यह राह आसान नहीं है। जहां ट्रेडर्स शॉर्ट-टर्म पेपर की मांग कर रहे हैं, वहीं इंश्योरेंस कंपनियों और पेंशन फंड जैसे बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स को लॉन्ग-टर्म एसेट्स की जरूरत है ताकि वे अपनी भविष्य की लायबिलिटीज को पूरा कर सकें।\n\nचालू फाइनेंशियल ईयर के लिए सरकार का ग्रॉस बॉरोइंग टारगेट ₹16.09 लाख करोड़ है, जिसमें से ₹7.89 लाख करोड़ अक्टूबर से मार्च के बीच जुटाए जाने हैं। अब निवेशकों की नजरें इस महीने के अंत में आने वाले सरकारी कैलेंडर पर टिकी हैं। यह शेड्यूल 7 अक्टूबर को होने वाली रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग से पहले मार्केट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
