UNCTAD की नई रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की **66%** बायोडायवर्सिटी विकासशील देशों में होने के बावजूद, वे **$3.8 ट्रिलियन** के मार्केट में सिर्फ **14%** हिस्सा ही हासिल कर पा रहे हैं।
UNCTAD की ताजा रिपोर्ट ने ग्लोबल बायोडायवर्सिटी ट्रेड में एक गंभीर आर्थिक असंतुलन की ओर इशारा किया है। अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्र दुनिया की करीब दो-तिहाई बायोडायवर्सिटी के मालिक हैं, लेकिन एक्सपोर्ट के मामले में इनकी हिस्सेदारी बहुत कम है। साल 2024 में बायोडायवर्सिटी आधारित उत्पादों का वैश्विक व्यापार $3.8 ट्रिलियन तक पहुंच गया, लेकिन इसमें संसाधन संपन्न इन देशों की हिस्सेदारी महज 14% रही, जबकि यूरोपीय बाजार 49% वॉल्यूम पर कब्जा जमाए हुए हैं।\n\nइस खाई की मुख्य वजह है कच्चे माल (Raw Materials) की प्रोसेसिंग। उदाहरण के लिए, अफ्रीका में कच्चा 'गम अरेबिक' $2.28 प्रति किलो में बिकता है, लेकिन हाई-इनकम देशों में प्रोसेस होने के बाद वही उत्पाद $6.50 प्रति किलो में वापस बाजार में आता है।\n\n### घरेलू प्रोसेसिंग के सामने बाधाएं\n\nइन देशों के लिए वैल्यू चेन में ऊपर चढ़ना मुश्किल है क्योंकि कच्चे माल जैसे भांग (Hemp), जूट और कपास पर 16% तक भारी टैरिफ लगते हैं। साथ ही, जटिल सेफ्टी और हाइजीन सर्टिफिकेशन के कड़े नियम छोटे किसानों और कारोबारियों की पहुंच से बाहर हैं।\n\n### निवेशकों के लिए क्या है संकेत?\n\nइन्वेस्टर्स के लिए यह एक स्पष्ट अवसर और रिस्क दोनों है। जो कंपनियां कच्चे माल को घरेलू स्तर पर ही फिनिश्ड गुड्स में बदल रही हैं, उनमें लंबी अवधि का पोटेंशियल दिख रहा है। हालांकि, 2026 में होने वाली UN बायोडायवर्सिटी कॉन्फ्रेंस से पहले ट्रेड पॉलिसी और सस्टेनेबिलिटी नियमों में बदलाव मुनाफे पर असर डाल सकते हैं। 'BioTrade' पहलों के तहत 2024 में $50.5 बिलियन की बिक्री हुई है, लेकिन कंपनियों को यह देखना होगा कि वे इन सस्टेनेबल फ्रेमवर्क्स को अपनाते हुए अपने मार्जिन को कैसे सुरक्षित रखती हैं।
