बिहार के गया में 'Bihar Integrated Manufacturing City' का आगाज हो चुका है, जिसमें शुरुआती तौर पर **₹4,200 करोड़** का निवेश मिलने का दावा किया गया है। यह प्रोजेक्ट **1,670 एकड़** में फैला है।
प्रोजेक्ट का स्वरूप और लक्ष्य
National Industrial Corridor Development Corporation (NICDC) ने गया के डोभी ब्लॉक में इस प्रोजेक्ट का संचालन शुरू कर दिया है। इसे बिहार इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी और फेडरल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर ट्रस्ट के बीच एक जॉइंट कोलैबोरेशन के रूप में तैयार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य टेक्सटाइल, एग्रो-प्रोसेसिंग, फर्नीचर और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टर्स को एक नई रफ्तार देना है।
निवेश का गणित
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए अब तक 12 एमओयू (MoU) साइन किए गए हैं, जिनसे ₹4,200 करोड़ का शुरुआती निवेश सुरक्षित हुआ है। सरकार का लक्ष्य इसे आगे चलकर ₹16,500 करोड़ तक ले जाने का है। अगस्त 2024 में केंद्र सरकार ने इसके लिए ₹1,339 करोड़ के शुरुआती खर्च को मंजूरी दी थी, जिसमें से ₹132 करोड़ की पहली इक्विटी किश्त जारी भी की जा चुकी है।
रणनीतिक महत्व
यह प्रोजेक्ट अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का हिस्सा है। NH-22 और NH-19 के पास होने और गया एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी के कारण इसे लॉजिस्टिक्स के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। फिलहाल, साइट पर पावर ग्रिड, वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट और फायर सेफ्टी जैसे बुनियादी ढांचे का काम जारी है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
हालांकि यह प्रोजेक्ट मैन्युफैक्चरिंग को विकेंद्रीकृत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स में काम की रफ्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर की टाइमलाइन अक्सर चुनौती बनती है। भविष्य में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कितनी तेजी से यह निवेश हकीकत में बदलता है और बिजली-पानी जैसी जरूरी सुविधाएं कितनी जल्दी चालू होती हैं।
