ग्लोबल रियल एस्टेट फर्म Savills की नई रिपोर्ट के अनुसार, 2035 तक Bengaluru दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला शहर होगा। इसकी बड़ी वजह यहां टैलेंट की उपलब्धता और Global Capability Centres (GCCs) का तेजी से विस्तार है।
दुनिया भर के 245 शहरों के विश्लेषण के बाद Savills ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि भारत का डेमोग्राफिक डिविडेंड और हाई-एंड कॉर्पोरेट फंक्शंस में बढ़ोतरी बेंगलुरु को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। अब ये शहर केवल कॉस्ट-आर्बिट्रेज तक सीमित नहीं है, बल्कि एक ग्लोबल इनोवेशन हब के रूप में उभरा है।
GCCs का बढ़ता दबदबा
रिपोर्ट के मुताबिक, Global Capability Centres (GCCs) का भारत में पैर जमाना गेम-चेंजर साबित हो रहा है। ये सेंटर न केवल जटिल तकनीक और रिसर्च का काम संभाल रहे हैं, बल्कि लंबे समय के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में भी निवेश कर रहे हैं। इससे कमर्शियल ऑफिस स्पेस की मांग में बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है, जो इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के लिए एक बड़ा मौका है।
हैदराबाद और चेन्नई की रेस
सिर्फ बेंगलुरु ही नहीं, बल्कि हैदराबाद और चेन्नई भी इस विकास में पीछे नहीं हैं। हैदराबाद की GDP प्रति व्यक्ति ग्रोथ सबसे तेज रहने का अनुमान है, जबकि चेन्नई मैन्युफैक्चरिंग और टेक-लेड सर्विस सेक्टर में स्थिरता के साथ आगे बढ़ रहा है। दक्षिण भारत का यह पूरा कॉरिडोर निवेशकों के लिए अब एक बड़ा हब बन चुका है।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
तेजी से बढ़ते इस विकास के साथ कुछ रिस्क भी जुड़े हैं। बढ़ती आबादी के दबाव के कारण सड़क परिवहन, पानी और ऊर्जा वितरण जैसे बुनियादी ढांचे पर संकट बढ़ रहा है। साथ ही, रहने की बढ़ती लागत और टैलेंट की मांग-आपूर्ति में असंतुलन से वेज इन्फ्लेशन (Wage Inflation) का खतरा भी है, जो कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर असर डाल सकता है।
आने वाले समय में, सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का समय पर पूरा होना निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मॉनिटरेबल होगा।
