RBI Rate Hike: 2027 तक नहीं बढ़ेंगी ब्याज दरें? Barclays ने बताई वजह

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AuthorNeha Patil|Published at:
RBI Rate Hike: 2027 तक नहीं बढ़ेंगी ब्याज दरें? Barclays ने बताई वजह

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Barclays का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) 2026 तक ब्याज दरों को स्थिर बनाए रखेगा। उनका मानना है कि भले ही सप्लाई-साइड के कारणों से महंगाई बढ़ी हो, लेकिन कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) अभी भी काबू में है।

2027 तक जस की तस रहेंगी ब्याज दरें?

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Barclays ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ब्याज दरों को लेकर बड़ा अनुमान लगाया है। फर्म का मानना है कि RBI, 2026 के अंत तक बेंचमार्क ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। इसका मतलब है कि यदि दरें बढ़ाई भी गईं, तो यह 2027 की शुरुआत में ही संभव होगा। RBI फिलहाल महंगाई को काबू में रखने और आर्थिक विकास को सहारा देने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

महंगाई पर क्या है रिपोर्ट?

Barclays की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) इन्फ्लेशन 4.4% पर पहुँच गया था, जो फरवरी में 3.2% था। लेकिन, यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से खाने-पीने, ईंधन और ज्वैलरी की कीमतों में आई अस्थिरता के कारण है। रिपोर्ट का अनुमान है कि महंगाई में इस बढ़ोतरी का लगभग 74% हिस्सा इन्हीं सप्लाई-साइड फैक्टर्स का है, न कि मांग में भारी उछाल का। Barclays ने यह भी कहा है कि CPI बास्केट की ज्यादातर चीजों में महंगाई 4% के नीचे ही है, जिससे पता चलता है कि कीमतों का दबाव अभी अर्थव्यवस्था में गहराई तक नहीं फैला है।

RBI की मौजूदा स्थिति

RBI ने अपनी पिछली पॉलिसी रिव्यू मीटिंग में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा था और 'न्यूट्रल' पॉलिसी का रुख बनाए रखा था। यह डेटा-डिपेंडेंट अप्रोच महंगाई पर नियंत्रण और घरेलू अर्थव्यवस्था को बढ़ाने पर RBI के फोकस को दर्शाता है। FY27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% और CPI इन्फ्लेशन का अनुमान 5.0% रखा गया है। यह स्थिर ग्रोथ-इन्फ्लेशन बैलेंस RBI को दरें स्थिर रखने की फ्लेक्सिबिलिटी देता है, बशर्ते महंगाई की उम्मीदें काबू में रहें।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?

ब्याज दरों का स्थिर रहना निवेशकों के लिए एक अहम फैक्टर है। बैंकिंग, रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टर, जो उधार की लागत के प्रति संवेदनशील होते हैं, उनके लिए यह एक सपोर्टिव संकेत है। स्थिर ब्याज दरें कंपनियों को अपने कैपिटल खर्च और कर्ज के प्रबंधन में अधिक पूर्वानुमेयता प्रदान करती हैं।

जोखिमों पर नजर

हालांकि, दरें स्थिर रहने की उम्मीद है, लेकिन आर्थिक परिदृश्य में कुछ जोखिम भी हैं। भू-राजनीतिक तनाव, खासकर पश्चिम एशिया में, और ग्लोबल ऑयल कीमतों पर इसका असर एक बड़ी चिंता बनी हुई है। इसके अलावा, अप्रत्याशित मानसून या सप्लाई-साइड के झटके से खाद्य कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव भी महंगाई पर दबाव डाल सकते हैं।

अगर इन जोखिमों के कारण महंगाई बढ़ती है, तो RBI को अपनी नीति पर फिर से विचार करना पड़ सकता है। ऐसे में, RBI की आने वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग्स में दिए जाने वाले बयान महत्वपूर्ण होंगे। निवेशकों को कोर इन्फ्लेशन के ट्रेंड्स पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यही किसी भी संभावित नीतिगत बदलाव के मुख्य संकेत होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.