बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को भीषण गर्मी से सालाना ₹34,000 करोड़ का झटका

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को भीषण गर्मी से सालाना ₹34,000 करोड़ का झटका

बांग्लादेश में बढ़ती गर्मी एक बड़ा आर्थिक संकट पैदा कर रही है। अनुमान है कि हर साल देश को लगभग **$4.1 बिलियन** (करीब **₹34,000 करोड़**) का नुकसान हो रहा है, जिसका मुख्य कारण असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की घटती उत्पादकता है। बढ़ता तापमान श्रमिकों की आय और सेहत दोनों पर असर डाल रहा है, जिससे आर्थिक स्थिरता पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है और कार्यस्थल सुरक्षा नियमों में तत्काल सुधार की ज़रूरत है।

गर्मी का प्रचंड प्रहार: अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा भारी असर

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था भीषण गर्मी की मार झेल रही है, जिससे हर साल अनुमानित $4.1 बिलियन यानी देश की जीडीपी का लगभग 1% का भारी नुकसान हो रहा है। इस नुकसान की सबसे बड़ी वजह देश का विशाल अनौपचारिक श्रमिक वर्ग है, जो कुल रोज़गार का करीब 85% हिस्सा है।

IIED की स्टडी: काम के घंटों और आय में गिरावट

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एनवायरनमेंट एंड डेवलपमेंट (IIED) की एक हालिया स्टडी बताती है कि बढ़ता तापमान काम के पैटर्न को बुरी तरह बिगाड़ रहा है और परिवारों की आय कम कर रहा है। रिसर्च के अनुसार, ढाका में बाहर काम करने वाले अनौपचारिक मज़दूर गर्मी से जुड़ी बीमारियों और उत्पादकता में कमी के चलते हर साल औसतन 23.7 कार्य दिवस खो देते हैं। वहीं, अंदर काम करने वाले श्रमिकों को भी सालाना करीब 13.5 कार्य दिवस का नुकसान उठाना पड़ता है। इससे सीधे तौर पर वित्तीय नुकसान हो रहा है, जहां बाहरी मज़दूर हर साल लगभग $149 और अंदरूनी मज़दूर करीब $89 कम कमा पाते हैं।

आर्थिक अस्थिरता का दुष्चक्र

यह आर्थिक असर सिर्फ़ मज़दूरी के नुकसान तक सीमित नहीं है। स्टडी गर्मी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए गरीबों के भारी मेडिकल खर्चों की ओर इशारा करती है। इसमें हीट एग्जॉशन, हीटस्ट्रोक और बार-बार डिहाइड्रेशन से होने वाली क्रोनिक किडनी की बीमारियां शामिल हैं। इन परिवारों के लिए आय का नुकसान अक्सर भोजन जैसी ज़रूरी चीज़ों पर खर्च कम करने पर मजबूर करता है और मेडिकल ज़रूरतों को पूरा करने के लिए कर्ज का बोझ बढ़ाता है।

मैक्रो इकोनॉमिक जोखिम और गारमेंट इंडस्ट्री पर असर

मैक्रो इकोनॉमिक नज़रिए से, ये नतीजे दक्षिण एशिया के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के लिए जलवायु संबंधी जोखिमों को उजागर करते हैं। गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग और अन्य लेबर-इंटेंसिव इंडस्ट्रीज के लिए एक प्रमुख वैश्विक हब होने के नाते, बांग्लादेश की आर्थिक वृद्धि सीधे तौर पर कार्यबल की उत्पादकता से जुड़ी है। लगातार पड़ने वाली हीट वेव और उत्पादन में गिरावट से सप्लाई चेन की स्थिरता पर असर पड़ सकता है और इस लेबर फोर्स पर निर्भर कंपनियों के लिए ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ सकती है।

मज़दूरों के लिए नए नियमों की मांग

फिलहाल, रिसर्चर और लेबर एक्टिविस्ट मज़बूत संस्थागत प्रतिक्रियाओं की मांग कर रहे हैं। स्टडी इस बात पर ज़ोर देती है कि बांग्लादेश के मौजूदा मज़दूर कानूनों में तापमान की कोई तय सीमा नहीं है और न ही गर्मी से जुड़ी बीमारियों को काम से जुड़ी बीमारियां माना जाता है, जिनके लिए मुआवजा दिया जा सके। सुझावों में पानी, छाया और आराम के ब्रेक जैसी अनिवार्य सुविधाएं शामिल हैं, साथ ही ऐसे मौसम-आधारित कैश ट्रांसफर प्रोग्राम विकसित करने की बात कही गई है जो अत्यधिक गर्मी के दौरान सबसे कमज़ोर मज़दूरों की मदद कर सकें।

निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए अहम बिंदु

निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए, यह देखना अहम होगा कि देश इन जलवायु जोखिमों को कम करने के लिए अपने मज़दूर नियमों को कैसे अनुकूलित करता है। गर्मी-सुरक्षा मानकों को मज़बूत करने या अनौपचारिक मज़दूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा में सुधार करने की कोई भी सरकारी कार्रवाई, क्षेत्र की आर्थिक उत्पादकता और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.