BSE CPSE Index: सरकारी कंपनियों पर भारी दबाव, 13 शेयरों ने छुए 52-वीक लो

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
BSE CPSE Index: सरकारी कंपनियों पर भारी दबाव, 13 शेयरों ने छुए 52-वीक लो

सरकारी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दौर जारी है। 13 Central Public Sector Enterprises (CPSE) अपने 52-वीक के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। पिछले एक महीने में BSE CPSE इंडेक्स **7%** लुढ़क चुका है, जिसका मुख्य कारण ऑयल मार्केटिंग और डिफेंस सेक्टर की चुनौतियां हैं।

बाजार में मची खलबली

8 अक्टूबर, 2026 के कारोबारी सत्र में BSE CPSE इंडेक्स पर दबाव साफ नजर आया। इंडेक्स में 1.3% की गिरावट देखी गई, जिससे पिछले एक महीने की कुल गिरावट 7% तक पहुंच गई है। यह परफॉर्मेंस बेंचमार्क Sensex से काफी कमजोर है, जो सरकारी कंपनियों के भविष्य को लेकर निवेशकों की चिंता को दर्शाता है।

ऑयल मार्केटिंग सेक्टर की मुश्किलें

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए LPG बिक्री से होने वाले घाटे अभी भी चिंता का विषय बने हुए हैं। अनुमान है कि चालू तिमाही में OMCs को लगभग ₹11,000 करोड़ का अंडर-रिकवरी (LPG पर होने वाला नुकसान) झेलना पड़ सकता है। हालांकि, यह पिछली तिमाही के ₹21,200 करोड़ के नुकसान से बेहतर है, लेकिन यह फाइनेंशियल बोझ अभी भी मुनाफे और वर्किंग कैपिटल के लिए बड़ी बाधा बना हुआ है।

डिफेंस और पावर सेक्टर का हाल

डिफेंस सेक्टर की सरकारी कंपनियां मार्जिन के दबाव और रॉ मटेरियल की बढ़ती लागत से जूझ रही हैं। प्राइवेट सेक्टर की तुलना में इनकी प्रोजेक्ट डिलीवरी और ऑर्डर बुक विस्तार की गति धीमी है। हालांकि, Power Grid और NLC जैसे रेग्युलेटेड यूटिलिटीज ने थोड़ा सहारा दिया है, क्योंकि इनका बिजनेस मॉडल कमोडिटी प्राइस की अस्थिरता से सुरक्षित रहता है।

आगे की राह

मैक्रोइकॉनॉमिक मोर्चे पर ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और FII का पैसा बाहर जाना, सरकारी शेयरों पर बिकवाली का दबाव बढ़ा रहा है। अब निवेशकों की नजर Q2 FY2027 के नतीजों पर टिकी है, जिससे ईंधन मार्जिन और ऑर्डर एग्जीक्यूशन की स्थिति स्पष्ट होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.