Border Roads Organisation (BRO) ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए **₹18,700 करोड़** का भारी-भरकम बजट प्लान किया है। इसके जरिए **475** सड़कों और **17** सुरंगों का निर्माण किया जाएगा, जो देश के कंस्ट्रक्शन सेक्टर के लिए ऑर्डर्स की नई लहर ला सकता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए नई उम्मीदें
BRO का यह ₹18,700 करोड़ का निवेश केवल बॉर्डर सुरक्षा ही नहीं, बल्कि देश के बड़े इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन (EPC) प्लेयर्स के लिए भी एक बड़ा संकेत है। देश की 15,106 किलोमीटर लंबी जमीनी सीमा पर यह खर्च डिफेंस लॉजिस्टिक्स को और मजबूत बनाएगा। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी सरकारी फंडिंग से जुड़ी कंपनियों को लंबे समय तक काम मिलता रहेगा।
नई टेक्नोलॉजी का सहारा
पुराने समय की बाधाओं जैसे जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition) और पर्यावरणीय मंजूरियों को दरकिनार करने के लिए BRO अब हाई-टेक हो रहा है। एजेंसी अब मैनुअल सर्वे के बजाय एयरबोर्न जियोफिजिकल मैपिंग और प्रोजेक्ट रिव्यूज के लिए AI का उपयोग कर रही है। इससे प्रोजेक्ट की मंजूरी में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा और कॉस्ट ओवररन्स की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी।
डिफेंस और आम जनता के लिए फायदे
ये निर्माण केवल सेना की मूवमेंट के लिए नहीं हैं। बॉर्डर के पास 'ऑल-वेदर' टनल बनने से दुर्गम इलाकों में भी सप्लाई लाइन हमेशा चालू रहेगी। इसके अलावा, ये प्रोजेक्ट सरकार के 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' का भी हिस्सा हैं, जिससे दूर-दराज के गांवों को मुख्य अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा सके।
निवेशकों के लिए टेक-अवे
EPC सेक्टर की उन कंपनियों के लिए यह गेम-चेंजर हो सकता है जिनके पास हिमालय जैसे कठिन इलाकों में काम करने की एक्सपर्टीज है। हालांकि, निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी होगी कि सरकारी एजेंसियां एनवायरमेंटल क्लीयरेंस और जमीन के मुद्दों को कितनी तेजी से सुलझाती हैं। बाजार अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए है कि कांट्रैक्ट्स का अवॉर्ड कितनी तेजी से होता है।
