BRICS का बड़ा फैसला: 'New Delhi Declaration' से बदलेंगे क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन के नियम

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AuthorMehul Desai|Published at:
BRICS का बड़ा फैसला: 'New Delhi Declaration' से बदलेंगे क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन के नियम

BRICS देशों ने 'Global Value Chains Action Plan 2026-2030' का ऐलान किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य क्रिटिकल मिनरल की लोकल प्रोसेसिंग को बढ़ाना है। यह कदम सदस्य देशों में इंडस्ट्रियल ग्रोथ को गति देगा।

नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने 'New Delhi Declaration' को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह फैसला क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन को पूरी तरह से बदलने वाला है। अब तक कच्चे माल के निर्यात पर निर्भर रहने वाले देश, अब खुद अपने संसाधनों की प्रोसेसिंग करेंगे।

क्या है 2026-2030 का एक्शन प्लान?

इस योजना के तहत 11 सदस्य देश—ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और UAE—एक मजबूत इंडस्ट्रियल नेटवर्क बनाएंगे। इसका मुख्य जोर ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और बैटरी स्टोरेज सिस्टम के लिए जरूरी मिनरल्स की घरेलू स्तर पर प्रोसेसिंग करने पर है।

निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?

इन्वेस्टर्स के लिए यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण है। अभी तक भारत समेत कई उभरते बाजारों को कच्चे माल के लिए बाहरी देशों पर निर्भर रहना पड़ता था। स्थानीय रिफाइनिंग शुरू होने से सप्लाई चेन छोटी होगी और ग्लोबल ट्रेड के झटकों का असर कम होगा। इससे इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और एनर्जी स्टोरेज सेक्टर से जुड़ी कंपनियों की इनपुट लागत में कमी आने की संभावना है।

भुगतान प्रणाली और चुनौतियां

घोषणापत्र में विदेशी मुद्रा की अस्थिरता को कम करने के लिए लोकल करेंसी और पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने पर भी जोर दिया गया है। हालांकि, 11 देशों के बीच आम सहमति बनाना और अलग-अलग रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क को एक साथ लाना एक बड़ी चुनौती होगी। यह एक लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजिक बदलाव है, इसलिए निवेशकों को देश-दर-देश आने वाले नीतिगत रोडमैप पर नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.