नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS समिट से पहले बड़ी खबर आई है। सदस्य देशों ने साफ कर दिया है कि फिलहाल किसी कॉमन करेंसी (Common Currency) पर कोई काम नहीं हो रहा है। इसके बजाय, अब जोर नेशनल पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने और डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल पर है ताकि डॉलर पर निर्भरता कम की जा सके।
12 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में शुरू होने वाले 18वें BRICS समिट से ठीक पहले सदस्य देशों ने अपने वित्तीय एजेंडे को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। ग्रुप ने आधिकारिक तौर पर एक साझा मुद्रा (Unified Currency) बनाने के विचार को पीछे छोड़ दिया है। अब पूरा ध्यान एक समानांतर वित्तीय इकोसिस्टम बनाने पर है, ताकि क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट को तेज और सस्ता बनाया जा सके और पश्चिमी देशों के सिस्टम पर निर्भरता घटाई जा सके।
डॉलर को चुनौती देने की नई रणनीति
पिछले कई महीनों से मार्केट में चर्चा थी कि BRICS देश डॉलर को टक्कर देने के लिए कोई नई करेंसी ला सकते हैं, लेकिन अब इसे खारिज कर दिया गया है। इसके बजाय, अब भारत के UPI जैसे फास्ट-पेमेंट सिस्टम और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को एक-दूसरे से जोड़ने पर काम किया जा रहा है। इसका मकसद यह है कि कारोबारी सीधे अपनी लोकल करेंसी में ट्रेड कर सकें, जिससे बिचौलिये बैंकों की भूमिका कम हो जाए।
भारत का स्टैंड और चुनौतियां
भारत ने शुरू से ही कॉमन करेंसी के विचार का विरोध किया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सदस्य देशों के बीच महंगाई दर, ब्याज दरें और आर्थिक लक्ष्यों में जमीन-आसमान का अंतर है। ऐसे में कॉमन करेंसी का मतलब होता अपनी मौद्रिक नीति (Monetary Policy) पर कंट्रोल खो देना, जिसे बड़े देश स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
निवेशकों के लिए क्या है जोखिम?
हालांकि यह प्लान ट्रांजैक्शन कॉस्ट कम करने के लिए अच्छा है, लेकिन इसमें जोखिम भी कम नहीं हैं। SWIFT जैसे वैश्विक नेटवर्क का विकल्प तैयार करने में तकनीकी और साइबर सुरक्षा की भारी चुनौतियां हैं। इसके अलावा, डॉलर से दूरी बनाने के कारण अमेरिका की तरफ से संभावित प्रतिबंधों या आर्थिक दबाव का रिस्क भी बना हुआ है।
फिलहाल, BRICS देशों के बीच आपसी व्यापार कुल वैश्विक व्यापार का केवल 5% है। इसलिए निवेशकों को दिल्ली समिट में इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि डिजिटल पेमेंट स्टैंडर्ड और रेगुलेटरी नियमों को लेकर क्या फैसले लिए जाते हैं और सुरक्षा के मामले में क्या ठोस खाका पेश किया जाता है।
