भारत में आयोजित BRICS वित्त मंत्रियों की बैठक में IMF और वर्ल्ड बैंक के वोटिंग स्ट्रक्चर में बड़े सुधार की मांग की गई है। इसके अलावा, ग्रुप ने ग्लोबल सप्लाई चेन को प्रभावित करने वाले एकतरफा ट्रेड बैरियर्स (Trade Barriers) की कड़ी आलोचना की है।
जयपुर और मुंबई में हुई इस हाई-लेवल बैठक में BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और सेंट्रल बैंक गवर्नर्स ने ग्लोबल फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन्स के मौजूदा ढांचे को चुनौती दी है। ब्लॉक ने साफ कहा है कि IMF और वर्ल्ड बैंक की वोटिंग पावर और लीडरशिप तय करने का मौजूदा सिस्टम पुराना हो चुका है। मंत्रियों का मानना है कि अब विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की हिस्सेदारी पहले से कहीं ज्यादा है, इसलिए उन्हें उसी के मुताबिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।\n\nग्रुप ने एकतरफा ट्रेड मेजर्स के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन के नियमों को दरकिनार कर लगाए जा रहे टैरिफ और प्रोटेक्शनिस्ट बैरियर्स को लेकर कड़ी आपत्ति जताई गई है। BRICS का कहना है कि 'नेशनल सिक्योरिटी' या 'क्लाइमेट गोल्स' के नाम पर लगाए जा रहे इन प्रतिबंधों से सप्लाई चेन अस्थिर हो रही है और डेवलपिंग देशों पर वित्तीय बोझ बढ़ रहा है।\n\nअगले साल 12-13 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS लीडर्स समिट से पहले यह चर्चा काफी अहम है। हालांकि, नई करेंसी को लेकर बाजार में जो अटकलें थीं, उन पर फिलहाल विराम लग गया है। अभी फोकस क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट इंटरऑपरेबिलिटी और लोकल करेंसी में ट्रेड सेटलमेंट को बढ़ावा देने पर है, ताकि बाहरी सिस्टम पर निर्भरता कम हो सके।\n\nग्लोबल ट्रेड में जारी तनाव के बीच यूरोपियन यूनियन का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) जैसे कदम उभरते बाजारों के एक्सपोर्टर्स के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। अब निवेशकों की नजर इस पर होगी कि क्या ये देश मिलकर Bretton Woods इंस्टीट्यूशन्स पर कोटा रिफॉर्म्स के लिए कितना दबाव बना पाते हैं, क्योंकि इसका असर लॉन्ग-टर्म कैपिटल फ्लो और ट्रेड डायनामिक्स पर पड़ना तय है।
