BRICS Business Council ने सदस्य देशों के बीच सप्लाई-चेन को मजबूत बनाने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में सहयोग के लिए एक नया फ्रेमवर्क पेश किया है। दुनिया के **40%** GDP का प्रतिनिधित्व करने वाला यह ग्रुप अब पेपरलेस और डिजिटल ट्रेड की ओर बढ़ रहा है।
BRICS Business Council ने 11 देशों के इस ब्लॉक में आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप तैयार किया है। नई दिल्ली में आयोजित XVIII BRICS समिट के दौरान काउंसिल ने AI, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग को अपने व्यापारिक नेटवर्क का मुख्य हिस्सा बनाने की योजना सामने रखी है। यह कदम केवल चर्चाओं तक सीमित नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर व्यापार को आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।
पेपरलेस ट्रेड का लक्ष्य
BRICS Business Council के इंडिया चैप्टर के चेयरमैन, जय श्रॉफ ने साफ किया कि इस रोडमैप की प्राथमिकता 'पेपरलेस ट्रेड' है। डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन को स्टैंडर्डाइज करके और सिस्टम्स को इंटर-ऑपरेबल बनाकर नौकरशाही की रुकावटों को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। मकसद साफ है: ब्लॉक को केवल टेक्नोलॉजी का कंज्यूमर रहने के बजाय ग्रीन एनर्जी, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल और डिजिटल लॉजिस्टिक्स में इनोवेटर बनाना।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
चूंकि यह ब्लॉक ग्लोबल GDP का लगभग 40% हिस्सा है, इसलिए इस फ्रेमवर्क के सफल होने पर ट्रांजैक्शन कॉस्ट में भारी कमी और सप्लाई चेन की स्थिरता में सुधार आ सकता है। काउंसिल जॉइंट फाइनेंसिंग स्ट्रक्चर पर भी जोर दे रही है ताकि हाई-टेक इंडस्ट्रियल महत्वाकांक्षाओं को फंड किया जा सके।
चुनौतियां और जोखिम
हालांकि, राह आसान नहीं है। निवेशकों को भू-राजनीतिक तनाव, क्रिटिकल मिनरल्स और टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग के जोखिमों पर पैनी नजर रखनी होगी। साथ ही, सदस्य देशों के बीच डिजिटल मैच्योरिटी और साइबर सिक्योरिटी में बड़ा अंतर है, जो AI इंटीग्रेशन में बाधा डाल सकता है। मैक्रो-इकोनॉमिक चुनौतियां जैसे महंगाई और राजकोषीय बाधाएं भी बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए पूंजी की उपलब्धता को प्रभावित कर सकती हैं। आने वाले समय में देशों द्वारा इन स्टैंडर्ड्स को लागू करने की प्रतिबद्धता ही इस योजना की सफलता तय करेगी।
