कर्नाटक में सूखे के हालात को लेकर विपक्ष के नेता R Ashoka ने राज्य सरकार पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने किसानों के लिए **₹25,000** प्रति एकड़ मुआवजे की मांग करते हुए राज्य की बिगड़ती आर्थिक स्थिति और किसान आत्महत्याओं के मामलों पर चिंता जताई है।
बिगड़ते हालात और राजनीतिक घमासान
कर्नाटक में सूखे का संकट गहराता जा रहा है, और इसे लेकर विपक्ष आक्रामक मुद्रा में है। विपक्ष के नेता R Ashoka ने राज्य सरकार द्वारा प्रति किसान ₹2,500 के मुआवजे को 'ऊंट के मुंह में जीरा' बताते हुए खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक किसानों को ₹25,000 प्रति एकड़ की मदद नहीं मिलती, तब तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संभालना मुश्किल है।
राज्य की खस्ताहाल तिजोरी
विपक्ष ने केवल मुआवजे की ही नहीं, बल्कि राज्य के खजाने की स्थिति पर भी बड़े सवाल उठाए हैं। R Ashoka के दावे के मुताबिक, कर्नाटक का कुल कर्ज बढ़कर ₹8.34 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है। सरकार पर आरोप है कि वह ठेकेदारों के ₹38,000 करोड़ के बकाये का भुगतान नहीं कर पा रही है और राज्य में बारिश की 36% कमी के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है।
कर्ज माफी की मांग
BJP ने अब सरकार से बैंकों और माइक्रोफाइनेंस कंपनियों को निर्देश जारी करने की मांग की है, ताकि किसानों से 2 साल तक लोन वसूली पर रोक लगाई जा सके। मांड्या जैसे जिलों में किसान आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं के बीच, BJP अपने सहयोगी दल Janata Dal (Secular) के साथ मिलकर इस मुद्दे को केंद्र तक ले जाने की तैयारी कर रही है। वहीं, राज्य सरकार अभी तक 50 लाख प्रभावित किसानों के लिए ₹1,250 करोड़ के बजट आवंटन पर ही कायम है।
