इलेक्टोरल रोल (Electoral Roll) के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर BJP और Congress के बीच सियासी जंग तेज हो गई है। Congress ने गृह मंत्री Amit Shah के प्रस्ताव को खारिज करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है।
राजधानी में राजनीतिक पारा उस समय चढ़ गया जब केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने विपक्ष को संसद में चुनावी रोल संशोधन (SIR) और वोट में हेरफेर के आरोपों पर बहस की चुनौती दी। हालांकि, Congress ने इस आमंत्रण को ठुकराते हुए अपनी शर्तें रख दी हैं।
विवाद की जड़: SIR प्रोसेस
विवाद का केंद्र 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) है। Congress का आरोप है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल भविष्य के परिसीमन (Delimitation) से पहले वोटिंग लिस्ट को अपने फायदे के लिए बदलने में किया जा रहा है। Congress महासचिव Jairam Ramesh ने साफ कहा है कि जब तक सरकार इस रिवीजन प्रक्रिया को सस्पेंड नहीं करती, वे किसी भी चर्चा में शामिल नहीं होंगे। इसके साथ ही, पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग करते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
BJP का पक्ष
वहीं, Bharatiya Janata Party का कहना है कि यह केवल एक मानक प्रक्रिया है, जो सही डेटा बनाए रखने के लिए जरूरी है। Amit Shah ने विपक्ष के दावों को महज 'सियासी हथकंडा' करार दिया है। उनका तर्क है कि विपक्ष अपनी चुनावी हार से ध्यान भटकाने और अवैध प्रवासियों को बचाने के लिए यह मुद्दा उठा रहा है।
मार्केट और निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
निवेशकों और बाजार के विश्लेषकों की नजर इस राजनीतिक खींचतान पर टिकी है। संसद में गतिरोध (Deadlock) होने से विधायी स्थिरता (Legislative Stability) पर सवाल खड़े होते हैं। यदि संसद का काम-काज ठप रहता है, तो सरकारी आर्थिक सुधारों और जरूरी बिलों के पास होने में देरी हो सकती है, जो बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकता है। निवेशकों के लिए फिलहाल यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार विपक्ष की मांगों पर कोई बीच का रास्ता निकालती है या फिर यह टकराव आगे और बढ़ता है।
