Axis Asset Management ने भारतीय शेयर बाजार में रिकवरी की उम्मीद जताई है। फर्म के मुताबिक, Nifty 50 में इस साल आई **12%** की गिरावट के बावजूद इकोनॉमी की ग्रोथ मजबूत है और विदेशी निवेशकों की निकासी केवल ग्लोबल एसेट रोटेशन का हिस्सा है।
भारतीय शेयर बाजारों में अब रिकवरी के संकेत मिलने लगे हैं। साल 2026 में Nifty 50 में 12% की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले 10 सालों के लगातार मुनाफे के ट्रेंड से अलग रही। इस दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने रिकॉर्ड $31.3 बिलियन की निकासी की, जिसने डोमेस्टिक निवेशकों के लिए चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।\n\n### मार्केट आउटलुक में बड़ा बदलाव\n\nविदेशी पूंजी के बाहर जाने के बावजूद, Axis Asset Management का नजरिया सकारात्मक बना हुआ है। फर्म का मानना है कि यह बिकवाली भारत की विकास गाथा (Growth Narrative) में कमी के कारण नहीं, बल्कि ग्लोबल निवेशकों द्वारा AI सेक्टर और बॉन्ड यील्ड में पैसा शिफ्ट करने के कारण है। देश की इकोनॉमी 7% से ऊपर की दर से बढ़ रही है, जिससे स्टॉक प्राइस और कॉर्पोरेट मुनाफे के बीच एक ऐसा अंतर पैदा हो गया है, जो लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए बेहतर वैल्यूएशन का मौका दे रहा है।\n\nपोर्टफोलियो के लिहाज से, कंपनी का फोकस इलेक्ट्रीफिकेशन, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और एनर्जी सेक्टर पर बना हुआ है। प्राइवेट सेक्टर बैंक और नॉन-बैंक फाइनेंशियल कंपनियों के वैल्यूएशन अब काफी आकर्षक नजर आ रहे हैं। सरकारी नीतियां भी इंडस्ट्रियल क्षमता बढ़ाने में मददगार साबित हो रही हैं।\n\n### मैक्रो रिस्क और चुनौतियां\n\nबाजार के सामने अभी भी कुछ बड़े जोखिम हैं। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें बढ़ी हुई हैं, जो घरेलू मैक्रो माहौल को प्रभावित कर रही हैं। इसके अलावा, ग्लोबल मॉनेटरी पॉलिसी और बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव भी बाजार पर असर डाल सकते हैं।\n\nआने वाले महीनों में बाजार की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां अपने मुनाफे को कैसे बनाए रखती हैं। निवेशकों को सलाह है कि वे तिमाही नतीजों के साथ-साथ ग्लोबल मैक्रो इंडिकेटर्स पर भी कड़ी नजर रखें।
