महंगाई के दबाव को देखते हुए ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने अनिवार्य पैकेजिंग रीसाइक्लिंग की योजनाओं को फिलहाल के लिए टाल दिया है। अब यह सेक्टर पुराने स्वैच्छिक (voluntary) ढांचे में ही काम करेगा, जिससे उन रीसाइक्लिंग कंपनियों के लिए अनिश्चितता बढ़ गई है जिन्होंने भविष्य की नीतियों को देखते हुए भारी निवेश किया था।
पर्यावरण मंत्री Murray Watt ने पुष्टि की है कि सरकार अपने मौजूदा कार्यकाल में अनिवार्य पैकेजिंग मानकों को लागू नहीं करेगी। सरकार का तर्क है कि इस समय जनता पर आर्थिक बोझ कम करना उनकी प्राथमिकता है, जिसके चलते पर्यावरण से जुड़े इन कड़े नियमों को पीछे छोड़ दिया गया है।
कंपनियों के लिए क्या है जोखिम?
वेस्ट मैनेजमेंट और पैकेजिंग से जुड़ी कंपनियों के लिए यह एक बड़ा नीतिगत जोखिम (Policy Risk) है। कई कंपनियों ने इस उम्मीद में अपना बुनियादी ढांचा बढ़ाया था कि सरकार के अनिवार्य नियमों के कारण बाजार में रीसायकल किए गए मटेरियल की मांग बढ़ेगी। लेकिन अब, जब नियम अनिवार्य नहीं हैं, तो इन कंपनियों के पास काम की कमी हो सकती है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिरता पर गहरा असर पड़ सकता है।
रीसाइक्लिंग का खराब हाल
आंकड़े बताते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में वर्तमान में प्लास्टिक पैकेजिंग रीसाइक्लिंग की दर केवल 20% है, जो 2025 के 70% के लक्ष्य से काफी दूर है। ऑस्ट्रेलियाई काउंसिल ऑफ रीसाइक्लिंग के अनुसार, रीसाइक्लिंग सुविधाएं अभी अपनी कुल क्षमता के सिर्फ 50% पर काम कर रही हैं। ये कंपनियां विदेशी सस्ते वर्जिन प्लास्टिक से मुकाबला करने में संघर्ष कर रही हैं, क्योंकि उन पर रीसाइक्लिंग का अतिरिक्त खर्च नहीं होता।
भविष्य की अनिश्चितता
रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में काम करने वाली कई कंपनियों के लिए यह आर्थिक संकट का सबब बन गया है। कुछ खिलाड़ी तो बाजार में मांग न होने के चलते पहले ही बंद होने की कगार पर हैं। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या राज्य स्तर पर कोई पहल होती है या यह सेक्टर तब तक अस्थिर रहेगा जब तक सरकार की ओर से कोई स्पष्ट नीति नहीं आ जाती।
