ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने बड़े टेक प्लेटफॉर्म्स के लिए एक महत्वपूर्ण नियम का ऐलान किया है। अब जो कंपनियां स्थानीय समाचार आउटलेट्स के साथ व्यावसायिक भुगतान समझौते नहीं करेंगी, उन्हें अपनी ऑस्ट्रेलियाई विज्ञापन आय का **2.5%** लेवी के तौर पर देना होगा। इस पैसे का इस्तेमाल देश में स्थानीय पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा।
विज्ञापन आय पर लगेगा 2.5% का लेवी
ऑस्ट्रेलियाई सरकार स्थानीय मीडिया को सपोर्ट करने के लिए टेक कंपनियों पर शिकंजा कस रही है। नए प्रस्ताव के तहत, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को समाचार सामग्री के लिए भुगतान करने के वास्ते व्यावसायिक समझौते करने होंगे, वरना उन्हें अपनी ऑस्ट्रेलियाई विज्ञापन आय का 2.5% लेवी के रूप में देना होगा। यह दर पहले प्रस्तावित 2.25% से ज्यादा है, जो यह दर्शाता है कि सरकार स्थानीय समाचार संस्थानों के लिए फंड सुनिश्चित करने को लेकर गंभीर है।
क्यों बदला लेवी का आधार?
इस नीति में एक अहम बदलाव यह है कि लेवी की गणना अब कंपनी के कुल बिजनेस रेवेन्यू के बजाय सीधे ऑस्ट्रेलिया में होने वाली विज्ञापन आय पर की जाएगी। जानकारों का मानना है कि इस कदम से उन कंपनियों को टारगेट किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर समाचार सामग्री से मुनाफा कमाती हैं। असिस्टेंट ट्रेजरर डैनियल मुलिनो के अनुसार, टैक्स बेस में बदलाव के बावजूद कुल वसूली को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
किन कंपनियों पर होगा असर?
यह नियम उन कंपनियों पर लागू होगा जिनका ऑस्ट्रेलिया में A$250 मिलियन से अधिक का लोकल रेवेन्यू है और जो बड़े सर्च या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का संचालन करती हैं। पहले माना जा रहा था कि Meta, Google और TikTok जैसी कंपनियां इसकी जद में आएंगी, लेकिन नए अपडेट के बाद प्रोफेशनल नेटवर्किंग साइट्स जैसे LinkedIn भी दायरे में आ गई हैं, बशर्ते वे मीडिया पब्लिशर्स के साथ भुगतान समझौते न करें।
मीडिया और टेक इन्वेस्टर्स के लिए मायने
यह डेवलपमेंट वैश्विक स्तर पर इस ट्रेंड को दिखाता है कि कैसे सरकारें डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और पारंपरिक समाचार आउटलेट्स के बीच आर्थिक संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं। लेवी को पत्रकारिता को बचाने के उपाय के तौर पर पेश किया जा रहा है, लेकिन यह ऑस्ट्रेलियाई ऑपरेशंस वाली बड़ी टेक कंपनियों के लिए एक नया खर्च जोड़ता है। कंपनियों पर इसका असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि वे स्थानीय पब्लिशर्स के साथ कितने प्रभावी ढंग से समझौते कर पाती हैं। इन्वेस्टर्स इस बात पर नजर रखेंगे कि टेक कंपनियां अपनी लोकल कमर्शियल स्ट्रैटेजी कैसे बदलती हैं और क्या यह नियम दूसरे देशों में भी ऐसी ही नीतियों को प्रभावित करता है।
