ऑस्ट्रेलिया की ट्रेजरी ने एक बड़ी चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2060 तक देश में मौतों का आंकड़ा जन्म लेने वालों से ज्यादा हो जाएगा। आबादी की धीमी रफ्तार और बुजुर्ग होती जनसंख्या से लेबर मार्केट और हेल्थकेयर सिस्टम पर भारी दबाव बढ़ने के आसार हैं।
ऑस्ट्रेलिया अपनी इकोनॉमी के एक बड़े मोड़ पर खड़ा है। नेशनल ट्रेजरी की रिपोर्ट बताती है कि अगले 40 सालों में देश की डेमोग्राफिक तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। अब तक लगातार जनसंख्या वृद्धि के दम पर दौड़ने वाली ऑस्ट्रेलियाई इकोनॉमी के लिए यह एक बड़ा स्ट्रक्चरल चैलेंज है।
लेबर मार्केट पर असर और बढ़ती लागत
ऑफिशियल आंकड़ों के अनुसार, सालाना जनसंख्या वृद्धि दर गिरकर 0.9% पर आ जाएगी, जो पिछले चार दशकों के 1.4% के औसत से काफी कम है। चौंकाने वाली बात यह है कि 2066 तक 85 साल से अधिक उम्र के लोगों की संख्या तिगुनी हो जाएगी। जैसे-जैसे वर्कफोर्स रिटायर होगी, बाजार में काम करने वालों की कमी होगी, जिससे लेबर कॉस्ट में भारी उछाल आना तय है।
सरकारी बजट पर बढ़ता बोझ
बढ़ती उम्र की आबादी का सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ेगा। हेल्थकेयर और एज-केयर सेक्टर में पहले से ही स्टाफ की किल्लत है। सरकार को अब एक तरफ पब्लिक सर्विस में निवेश करना है, तो दूसरी तरफ सुस्त होती इकोनॉमी को संभालना है, जो फिजिकल प्लानिंग के लिए एक बड़ी चुनौती है।
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज की नीतियां
आवास और महंगाई की समस्या को देखते हुए प्रधानमंत्री Anthony Albanese की सरकार ने इमिग्रेशन नियमों को सख्त कर दिया है। फिलहाल देश हाई इन्फ्लेशन और ऊंचे इंटरेस्ट रेट्स से जूझ रहा है। हालांकि, ट्रेजरी का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर भविष्य में इकोनॉमी को स्थिरता दे सकते हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स अब यह देख रहे हैं कि इन बदलावों का हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस सेक्टर की डिमांड पर कैसा असर पड़ता है।
