ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था में जून तिमाही के दौरान **0.4%** की ग्रोथ दर्ज की गई है, जो अनुमानों से काफी बेहतर है। इसके चलते रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना बढ़कर **57%** हो गई है, जिसने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
उम्मीद से बेहतर रफ्तार
ऑस्ट्रेलियाई इकोनॉमी ने अपनी मजबूती का प्रमाण देते हुए जून तिमाही में 0.4% की ग्रोथ हासिल की है। यह आंकड़ा न केवल बाजार के अनुमानों से अधिक है, बल्कि वार्षिक आधार पर 2.1% की वृद्धि के साथ केंद्रीय बैंक के 2% के 'नॉन-इन्फ्लेशनरी' थ्रेशोल्ड से भी ऊपर निकल गया है। इससे साफ है कि देश में डिमांड अभी भी बनी हुई है, जो महंगाई को काबू करने की राह में चुनौती पैदा कर रही है।
ब्याज दरों का बढ़ता दबाव
'ऑस्ट्रेलियन ब्यूरो ऑफ स्टेटिस्टिक्स' के आंकड़ों के बाद मार्केट का मूड पूरी तरह बदल गया है। निवेशकों को अब लगने लगा है कि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी और सख्त करनी होगी। वर्तमान में वहां कैश रेट 4.35% पर है और सितंबर की मीटिंग में रेट हाइक की संभावना 57% तक पहुंच गई है।
ग्लोबल मार्केट पर असर
यह घटनाक्रम सिर्फ ऑस्ट्रेलिया तक सीमित नहीं है। ऑस्ट्रेलिया ग्लोबल कमोडिटी मार्केट का एक बड़ा खिलाड़ी है, और वहां ब्याज दरों में बदलाव का असर सीधे तौर पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और वैश्विक पूंजी प्रवाह (Capital Flows) पर पड़ेगा। भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स के लिए भी यह एक चेतावनी है, क्योंकि ग्लोबल लिक्विडिटी और ब्याज दरों का अंतर सीधे तौर पर हमारे करेंसी और इक्विटी बाजार की चाल को प्रभावित करता है। अब सभी की निगाहें RBA की अगली पॉलिसी मीटिंग पर टिकी हैं कि वे विकास और महंगाई के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं।
