Assocham की मांग: BRICS समिट से पहले चीन के साथ वीजा और ट्रेड बाधाएं हों दूर

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Assocham की मांग: BRICS समिट से पहले चीन के साथ वीजा और ट्रेड बाधाएं हों दूर

इंडस्ट्री बॉडी Assocham ने सरकार से मांग की है कि आगामी 12-13 सितंबर 2026 को होने वाले BRICS समिट से पहले चीन के साथ वीजा और ट्रेड से जुड़ी समस्याओं का समाधान निकाला जाए। इन बाधाओं के कारण EV और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में प्रोजेक्ट्स में देरी हो रही है।

व्यापार में बड़ी बाधाएं

Assocham ने सरकार से आग्रह किया है कि चीन के साथ व्यापारिक और प्रशासनिक बाधाओं को उच्च-स्तरीय बातचीत के जरिए सुलझाया जाए। समस्या की जड़ है तकनीकी एक्सपर्ट्स के लिए वीजा मिलने में होने वाली देरी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई कंपनियों को केवल 20% से 40% ही वीजा अप्रूवल मिल पा रहे हैं। बिना चीनी एक्सपर्ट्स के, नई मशीनरी इंस्टॉल करना और मेंटेनेंस करना मुश्किल हो रहा है, जिससे प्रोजेक्ट डेडलाइन मिस होने का खतरा बना हुआ है।

मैन्युफैक्चरिंग पर असर

सिर्फ वीजा ही नहीं, बल्कि दुर्लभ अर्थ मैग्नेट, मोटर्स और सेंसर जैसे जरूरी पार्ट्स के इंपोर्ट में भी अनिश्चितता बनी हुई है। इसका सीधा असर इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के प्रोडक्शन साइकल पर पड़ रहा है। हालांकि मार्च 2026 में सरकार ने चीनी निवेश के लिए 60 दिन की तेजी से FDI अप्रूवल विंडो शुरू की थी, लेकिन इंडस्ट्री का मानना है कि 'मेक इन इंडिया' प्रोजेक्ट्स को पटरी पर रखने के लिए और राहत की जरूरत है।

निवेशकों के लिए संकेत

जो कंपनियां चीन से आने वाली मशीनरी या पार्ट्स पर निर्भर हैं, उन्हें लागत में बढ़त (Cost Inflation) या काम शुरू होने में देरी का सामना करना पड़ सकता है। शेयरधारकों को सलाह है कि वे सरकारी अपडेट्स पर नजर रखें, क्योंकि कोई भी नीतिगत बदलाव सीधे कंपनियों के मैन्युफैक्चरिंग विस्तार की रफ्तार को प्रभावित करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.