एशियाई बाजारों में हफ्ते की शुरुआत बढ़त के साथ हुई है। सेमीकंडक्टर और AI चिप्स की भारी डिमांड ने तेजी को सपोर्ट दिया है, लेकिन अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय बाजार के लिए टेंशन का सबब बनी हुई हैं।
एशियाई बाजारों में हफ्ते की शुरुआत टेक्नोलॉजी सेक्टर की दम पर सकारात्मक रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी हार्डवेयर की मांग के चलते दक्षिण कोरिया समेत कई प्रमुख एशियाई इंडेक्स में तेजी देखी गई। यह साफ है कि ग्लोबल निवेशक अभी भी AI थीम पर दांव लगा रहे हैं।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का खतरा
टेक्नोलॉजी सेक्टर में उत्साह के बावजूद, निवेशकों की नजर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर टिकी है। पिछले दो हफ्तों में 2-ईयर US ट्रेजरी नोट्स में 36 बेसिस पॉइंट्स का उछाल आया है, जो 2024 के मध्य के बाद का उच्चतम स्तर है। यह भारतीय निवेशकों के लिए चिंता की बात है, क्योंकि ऊंची यील्ड विदेशी निवेशकों (FIIs) को भारतीय बाजार से पैसा निकालकर अमेरिकी बॉन्ड में निवेश करने के लिए प्रेरित कर सकती है। साथ ही, मार्केट में अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा रेट हाइक की 56% संभावना जताई जा रही है, जो ग्लोबल लिक्विडिटी के लिए खतरा है।
कच्चा तेल और जियोपॉलिटिकल रिस्क
मिडल ईस्ट में जारी तनाव और सऊदी अरब के इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल के पार बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए तेल की यह ऊंची कीमत रुपये पर दबाव डाल रही है और महंगाई के जोखिम को बढ़ा रही है। एनालिस्ट्स का मानना है कि यदि सप्लाई में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले हफ्तों में स्थिति और बिगड़ सकती है, जो तेल मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन को सीधे प्रभावित करेगी।
ग्लोबल मैक्रो हालात
यूरोप में फ्रांस के कर्ज का संकट और जर्मनी के चुनावी नतीजों के कारण भी ग्लोबल बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है। डॉलर इंडेक्स की मजबूती से रुपया लगातार दबाव में है, जिससे आयात महंगा हो रहा है। निवेशकों को सलाह है कि वे क्रूड ऑयल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के पोर्टफोलियो एक्शन पर नजर रखें, क्योंकि ग्लोबल संकेतों के आधार पर ही आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय होगी।
