Asian Markets: भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के आगे टिक नहीं पाया US टेक कंपनियों का दम

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Asian Markets: भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के आगे टिक नहीं पाया US टेक कंपनियों का दम

एशियाई शेयर बाजारों में गुरुवार को गिरावट दर्ज की गई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल के भाव **$110** प्रति बैरल के पार जाने से निवेशकों का सेंटिमेंट बिगड़ गया है, जिससे लोग अब सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं।

एशियाई बाजारों के लिए गुरुवार का दिन दबाव भरा रहा, जहां MSCI Asia-Pacific इंडेक्स में 0.2% की गिरावट देखी गई। हालांकि Meta और Super Micro जैसी कंपनियों ने तिमाही नतीजों में शानदार प्रदर्शन किया था, लेकिन वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे तनाव ने इस तेजी को बेअसर कर दिया।

प्रमुख बाजारों का हाल

जापान का Nikkei इंडेक्स अपनी शुरुआती बढ़त को गंवाकर 0.4% नीचे बंद हुआ, जबकि दक्षिण कोरियाई बाजार में 1% से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। यह बिकवाली Bank of Korea द्वारा ब्याज दरों को 3.00% पर स्थिर रखने के फैसले के बाद और तेज हो गई। निवेशक अब यह सोचने पर मजबूर हैं कि AI इन्फ्रास्ट्रक्चर पर किया जा रहा भारी-भरकम खर्च क्या वाकई लॉन्ग-टर्म रिटर्न दे पाएगा?

तेल की कीमतों का डर

एशियाई बाजारों पर सबसे बड़ा खतरा मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का है। Brent crude के दाम $110.03 प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं, जो पिछले 5 महीनों का उच्चतम स्तर है। चूंकि अधिकांश एशियाई अर्थव्यवस्थाएं ऊर्जा के आयात पर निर्भर हैं, इसलिए तेल की ऊंची कीमतें सीधे तौर पर महंगाई को बढ़ावा दे रही हैं और कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर चोट कर रही हैं।

आगे क्या?

बाजार की नजरें अब US फेडरल रिजर्व के फैसलों और आगामी चुनावों पर टिकी हैं। जब तक कच्चे तेल के दाम ऊंचे बने रहेंगे और क्षेत्र में अनिश्चितता बनी रहेगी, तब तक बाजार में अस्थिरता (Volatility) बने रहने की पूरी आशंका है। फिलहाल, निवेशक किसी भी जोखिम से बचने के लिए सरकारी बॉन्ड्स जैसे सुरक्षित विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.