एशियाई बाजारों में आज तेजी का रुख है। Nasdaq की रिकॉर्ड बढ़त और Nvidia जैसे AI स्टॉक्स की डिमांड का असर एशियाई इंडेक्स पर दिख रहा है, हालांकि **5.31%** के स्तर पर बने US 10-वर्षीय Treasury Yields ने निवेशकों की सावधानी बढ़ा दी है।
ग्लोबल बाजारों में इस वक्त दोहरी स्थिति बनी हुई है। एक तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेक्नोलॉजी सेक्टर में खरीदारी का माहौल है, तो दूसरी तरफ बॉन्ड मार्केट की बढ़ती यील्ड ने निवेशकों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है।\n\n### AI का जलवा और Nvidia का दम\nमार्केट में जारी तेजी का मुख्य ड्राइवर AI सेक्टर है। Nvidia का मार्केट वैल्यूएशन $5.76 ट्रिलियन तक पहुंच गया है, जो चिप टेक्नोलॉजी और कंप्यूटिंग पावर की बढ़ती भूख को दर्शाता है। इस सेंटीमेंट ने बॉन्ड यील्ड के दबाव को फिलहाल के लिए बेअसर कर दिया है। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना भी अब घटकर 20-24% के आसपास रह गई है।\n\n### बॉन्ड मार्केट का रिस्क\nचिंता की बात यह है कि US 10-वर्षीय Treasury Yields 5.31% पर स्थिर हैं, जो साल 2002 के बाद का उच्चतम स्तर है। जब सरकारी बॉन्ड में इतना रिटर्न मिलता है, तो इक्विटी मार्केट के लिए पैसा जुटाना महंगा हो जाता है और निवेशक जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनाने लगते हैं।\n\n### करेंसी और फॉरेक्स का हाल\nयूरो (Euro) में बड़ी गिरावट देखी गई है, जो 17 महीने के निचले स्तर पर आ गया है। फ्रांस में राजकोषीय अस्थिरता (Fiscal Instability) के चलते निवेशक डॉलर की ओर भाग रहे हैं, जिससे डॉलर इंडेक्स को मजबूती मिल रही है।\n\n### भारतीय निवेशकों के लिए क्या है संकेत?\nभारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स के लिए ग्लोबल संकेतों का असर सीधा होता है। अगर US यील्ड्स लंबे समय तक हाई बनी रहती हैं, तो विदेशी निवेशकों (FIIs) का पैसा भारतीय शेयर बाजार से निकलकर सुरक्षित US बॉन्ड्स की ओर जा सकता है। आने वाले दिनों में फेडरल रिजर्व की कमेंट्री और US इन्फ्लेशन डेटा पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा, क्योंकि ये तय करेंगे कि मार्केट में आगे वोलेटिलिटी कितनी रहेगी।
