मिडल ईस्ट में तनाव कम होने और क्रूड ऑयल के दाम घटने से एशियाई बाजारों में रिकवरी देखी जा रही है। अब निवेशकों का पूरा फोकस शुक्रवार को आने वाले US जॉब्स डेटा पर है, जो ब्याज दरों की दिशा तय करेगा।
गुरुवार को एशियाई बाजारों में राहत की लहर देखने को मिली। मिडल ईस्ट में तनाव कम होने के संकेतों के बीच, ब्रेंट क्रूड ऑयल $95 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। भारतीय निवेशकों के लिए यह राहत की खबर है, क्योंकि कच्चे तेल के दाम कम होने से भारत का इंपोर्ट बिल कम होगा, जिससे रुपये को मजबूती मिल सकती है और महंगाई का दबाव भी घटेगा।
फेडरल रिजर्व और US जॉब्स डेटा का असर
मिडल ईस्ट की चिंताएं भले ही कम हुई हों, लेकिन मार्केट अभी भी सतर्क है। सबकी नजरें US लेबर मार्केट पर टिकी हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में प्राइवेट सेक्टर में केवल 38,000 नौकरियां जुड़ी हैं, जो साल की सबसे धीमी रफ्तार है। अब सबकी निगाहें शुक्रवार, 4 सितंबर को आने वाले नॉन-फार्म पेरोल्स डेटा पर हैं। यह डेटा तय करेगा कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी को रोकेगा या आगे और सख्ती जारी रखेगा।
रिस्क अभी भी बाकी
बाजार की इस तेजी के बीच कुछ चुनौतियां अब भी बरकरार हैं। ग्लोबल बॉन्ड यील्ड्स अभी भी कई सालों के उच्चतम स्तर के करीब हैं, जिससे कंपनियों के लिए कर्ज लेना महंगा हो गया है। इसके अलावा, चिपफ्लेशन (Chipflation) यानी सेमीकंडक्टर्स की बढ़ती कीमतें टेक सेक्टर के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। जापानी येन (Japanese Yen) में उतार-चढ़ाव भी एशियाई लिक्विडिटी को प्रभावित कर सकता है। निवेशकों को सलाह है कि वे ग्लोबल मैक्रो फैक्टर्स और फेडरल रिजर्व की भविष्य की टिप्पणियों पर नजर बनाए रखें।
