एशियाई शेयर बाजारों की शुरुआत आज कमजोरी के साथ हुई है। निवेशक अमेरिकी सेंट्रल बैंक के ब्याज दरों पर फैसले और दिग्गज टेक कंपनियों के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। साथ ही, **10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड** का **5%** के करीब बने रहना उभरते बाजारों (Emerging Markets) के लिए चुनौती बना हुआ है।
एशियाई बाजारों में हफ्ते की शुरुआत काफी सावधानी के साथ हुई है। जापान के निक्केई (Nikkei) और दक्षिण कोरियाई बाजारों में गिरावट देखी गई। यह सुस्ती मुख्य रूप से वैश्विक सेंट्रल बैंकों की आगामी नीतियों को लेकर अनिश्चितता की वजह से है। हालांकि, माना जा रहा है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस हफ्ते ब्याज दरों को स्थिर रखेगा, लेकिन दिसंबर में दरें बढ़ने की आशंका ने बाजार में घबराहट पैदा कर दी है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
भारतीय निवेशकों की नजरें फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FII) की एक्टिविटी पर टिकी हैं। जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5% जैसे ऊंचे स्तर पर रहती है, तो सुरक्षित निवेश के विकल्प इक्विटी की तुलना में अधिक आकर्षक हो जाते हैं। इसका सीधा असर इमर्जिंग मार्केट्स पर पड़ता है। अगर FII का पैसा बाहर निकलता है, तो निफ्टी और सेंसेक्स में भारी बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है।
टेक जायंट्स के नतीजे और भारतीय आईटी सेक्टर
इस हफ्ते Alphabet, Microsoft और Amazon जैसी अमेरिकी टेक कंपनियों के नतीजे बाजार की दिशा तय करेंगे। भारतीय आईटी सेक्टर इन कंपनियों की गाइडेंस को बहुत बारीकी से ट्रैक करता है। अगर AI-ड्रिवन ग्रोथ को लेकर इनके नतीजों में कमी दिखती है, तो इसका असर भारतीय टेक कंपनियों के वैल्युएशन पर भी पड़ सकता है।
इसके अलावा, महंगाई और ऊर्जा लागत को लेकर सेंट्रल बैंक अभी भी सतर्क हैं। भारतीय बाजार के लिहाज से अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वैश्विक स्तर पर होने वाले बदलाव रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की लिक्विडिटी और रुपये की स्थिरता को किस तरह प्रभावित करते हैं। आने वाले कुछ हफ्तों में घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
