एशियाई बाजारों में लगातार चौथे हफ्ते गिरावट का दौर जारी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर पर कंपनियों के भारी खर्च को लेकर निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं, जिससे ग्लोबल स्तर पर बिकवाली का माहौल है।
बाजार में बिकवाली क्यों है?
एशियाई फाइनेंशियल मार्केट में शुक्रवार को भारी गिरावट देखने को मिली। निवेशकों को यह डर सता रहा है कि AI डेटा सेंटर्स पर जो अरबों डॉलर खर्च किए जा रहे हैं, क्या वे मौजूदा महंगे इकोनॉमिक माहौल में सही रिटर्न दे पाएंगे।
टेक स्टॉक्स का बुरा हाल
Nasdaq पर दबाव का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखा है। दक्षिण कोरिया का KOSPI इंडेक्स 1.7% गिर गया, जबकि चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनी SK Hynix के शेयर 2.5% लुढ़क गए। वहीं, जापान का Nikkei इंडेक्स 1.3% नीचे रहा, जो दिखाता है कि हाई-ग्रोथ टेक स्टॉक्स पर निवेशकों का भरोसा कम हो रहा है।
सुरक्षित निवेश की ओर दौड़
इक्विटी मार्केट में हलचल के बीच निवेशक अब सुरक्षित माने जाने वाले अमेरिकी सरकारी बॉन्ड्स (US Treasury bonds) की ओर रुख कर रहे हैं। पिछले तीन साल में यह सबसे बड़ी रैली रही, जिससे 10 साल के बॉन्ड यील्ड गिरकर 5% के नीचे आ गए। यह साफ संकेत है कि निवेशक अब जोखिम कम लेना चाहते हैं और भविष्य में ब्याज दरों (Interest rates) में बढ़ोतरी की उम्मीदें भी कम हो गई हैं।
कच्चा तेल और भारत पर असर
मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent crude) $114 प्रति बैरल पर बना हुआ है, जो महंगाई की चिंता बढ़ा रहा है। भारतीय निवेशकों के लिए यह स्थिति सतर्क रहने वाली है। अगर ग्लोबल मार्केट में रिस्क बढ़ता है, तो विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का पैसा बाहर निकल सकता है, जिससे हमारे लोकल इंडेक्स पर भी दबाव बन सकता है। इसके अलावा, ग्लोबल टेक सेक्टर की री-वैल्यूएशन का असर भारतीय आईटी (IT) कंपनियों के सेंटीमेंट पर भी पड़ सकता है।
