Asian Markets: कच्चे तेल में उछाल और US Bond Yields के 5% पर पहुँचने से एशियाई बाजारों में हड़कंप

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
Asian Markets: कच्चे तेल में उछाल और US Bond Yields के 5% पर पहुँचने से एशियाई बाजारों में हड़कंप

सऊदी अरब में सप्लाई में बाधा के चलते Brent Crude **$106** प्रति बैरल के पार निकल गया है। वहीं, US 10-Year Treasury Yield **5%** तक पहुँच गई है, जिससे ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने का डर पैदा हो गया है। भारतीय बाजार आज गणेश चतुर्थी की छुट्टी के कारण बंद हैं, जिससे निवेशकों को इस ग्लोबल उठापटक को समझने का थोड़ा समय मिल गया है।

ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट्स फिलहाल भारी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। सऊदी अरब में एक प्रमुख पाइपलाइन में सप्लाई बाधा की खबरों के बाद Brent Crude के दाम $106 प्रति बैरल के ऊपर चले गए हैं। यह घटना ग्लोबल स्तर पर सप्लाई की कमी का डर पैदा कर रही है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।

US Yields का बढ़ता दबाव

इसके साथ ही, निवेशकों की नजरें US 10-Year Treasury Yield पर टिकी हैं, जो 5% के स्तर को छू गई है। यह पिछले एक साल का उच्चतम स्तर है। जब सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़ती है, तो निवेशक शेयरों जैसे रिस्की एसेट्स से पैसा निकालकर बॉन्ड की ओर रुख करते हैं। इसका सीधा असर एशियाई बाजारों के इंडेक्स पर दिख रहा है, क्योंकि अब कंपनियों के फ्यूचर अर्निंग्स पर ऊंचे ब्याज दरों का असर पड़ने का डर है।

भारतीय बाजारों के लिए क्या है स्थिति?

आज गणेश चतुर्थी के मौके पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) बंद हैं। यह छुट्टी घरेलू निवेशकों के लिए एक 'बफर' की तरह काम कर रही है, क्योंकि उन्हें आज की इंस्टेंट वोलेटिलिटी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

हालांकि, भारत के लिए खतरा बरकरार है। भारत बड़े पैमाने पर कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में तेजी का असर हमारे ट्रेड बैलेंस पर पड़ेगा। इसके अलावा, एयरलाइंस, ऑयल मार्केटिंग कंपनियां और पेंट बनाने वाली कंपनियों के लिए इनपुट कॉस्ट बढ़ सकती है। साथ ही, अगर US यील्ड्स लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहती हैं, तो विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) उभरते बाजारों से अपना पैसा निकाल सकते हैं।

बाजार खुलने पर निवेशकों की नजरें इस बात पर होंगी कि क्या कच्चे तेल की कीमतें स्थिर होती हैं या सप्लाई चेन का संकट और गहराता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.