मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव और खाड़ी में तूफानी खतरों के बीच कच्चे तेल के दाम **$101** प्रति बैरल के पार निकल गए हैं। इस हलचल का असर एशियाई बाजारों पर साफ दिख रहा है, जहां अनिश्चितता के चलते इक्विटी में दबाव बना हुआ है।
बुधवार को एशियाई बाजारों में सुस्ती का माहौल रहा। MSCI Asia-Pacific इंडेक्स 0.3% तक फिसल गया है। ट्रेडर्स जहां एक तरफ अमेरिका में रिकॉर्ड तेजी पर नजर बनाए हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ भू-राजनीतिक अस्थिरता और सप्लाई चेन में बाधाओं के चलते निवेशकों का मूड बिगड़ा हुआ है।
कच्चे तेल में क्यों आई तेजी?
ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) के दाम $101.50 के स्तर को पार कर गए हैं। इसकी मुख्य वजह सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ रहा टकराव है। सऊदी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की खबरों से कमोडिटी ट्रेडर्स सतर्क हैं, क्योंकि बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर तेल की सप्लाई को लेकर खतरा मंडरा रहा है। इसके अलावा, गल्फ ऑफ मैक्सिको में उठ रहे तूफान ने भी कीमतों को ऊपर धकेलने में बड़ी भूमिका निभाई है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में उछाल सीधे तौर पर देश के आयात बिल को बढ़ाता है, जिससे महंगाई (Inflation) का खतरा पैदा होता है। निवेशक अब खास तौर पर Indian Oil, BPCL और HPCL जैसे शेयरों पर नजर रखे हुए हैं, क्योंकि क्रूड की लागत बढ़ने से इन कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
फेडरल रिजर्व की चाल पर नजर
बाजार की नजरें अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) पर टिकी हैं। आज शाम फेड के सितंबर मीटिंग के मिनट्स जारी होने वाले हैं। अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद जो एक हफ्ते पहले 50% थी, अब गिरकर 19% रह गई है। निवेशकों को उम्मीद है कि फेड के फैसलों से ग्लोबल लिक्विडिटी और उभरते बाजारों (Emerging Markets) में विदेशी निवेश के रुख की तस्वीर साफ होगी। फिलहाल, बाजार का पूरा फोकस मिडल ईस्ट की स्थिति और फेडरल रिजर्व के कमेंट्री पर टिका हुआ है।
