शुक्रवार, 2 अक्टूबर को एशियाई शेयर बाजारों में सुस्ती देखी गई। इसकी मुख्य वजह US 10-year Treasury yields का **5.34%** के स्तर पर पहुंचना है, जो साल **2002** के बाद का उच्चतम स्तर है। निवेशक रिस्की एसेट से दूरी बना रहे हैं और US जॉब डेटा का इंतजार कर रहे हैं।
बॉन्ड यील्ड का दबाव और बाजार की सुस्ती
शुक्रवार की सुबह ग्लोबल मार्केट के लिए बेहद तनावपूर्ण रही। बेंचमार्क 10-year US Treasury yield में आई तेजी ने निवेशकों को सहमा दिया है। हालांकि यील्ड 5.34% के पीक को छूने के बाद 5.25% पर सेटल हुई, लेकिन यह पिछले दो दशकों में सबसे ऊंचा स्तर है। जब सरकारी बॉन्ड से इतना अच्छा रिटर्न मिलता है, तो निवेशक शेयरों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित एसेट की ओर भागते हैं, जिससे पूरे एशिया में इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव बन गया है।
यूरोप की चिंताएं और ग्लोबल मार्केट
सिर्फ अमेरिका ही नहीं, यूरोप से भी खराब संकेत मिल रहे हैं। फ्रांस और जर्मनी के बॉन्ड यील्ड के बीच का फासला बढ़कर 140 बेसिस पॉइंट्स से ऊपर निकल गया है, जो 2012 के बाद का सबसे बड़ा अंतर है। यह यूरोप के कुछ देशों की आर्थिक स्थिरता पर निवेशकों के भरोसे में कमी को दर्शाता है।
अब सबकी नजर US जॉब डेटा पर
मार्केट का पूरा ध्यान अब आने वाली US Nonfarm Payroll रिपोर्ट पर है। उम्मीद है कि सितंबर में 90,000 नौकरियां जुड़ी होंगी और बेरोजगारी दर 4.1% पर स्थिर रह सकती है। यह डेटा US Federal Reserve के लिए महत्वपूर्ण है। अगर जॉब मार्केट गरम रहता है, तो Fed को ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रखनी पड़ सकती हैं, जो कंपनियों की ग्रोथ के लिए निगेटिव है।
क्रूड और भारतीय बाजार पर असर
ऊपर से Brent crude भी $102 प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है, जो महंगाई की आग को और भड़का रहा है। भारतीय निवेशकों के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि विदेशी निवेशक (FIIs) सुरक्षित डॉलर एसेट्स की तलाश में इमर्जिंग मार्केट जैसे भारत से पैसा निकाल सकते हैं। इससे रुपया कमजोर हो सकता है और लोकल बाजार में लिक्विडिटी कम हो सकती है।
