Asia-Pacific के शेयर बाजार ने **$50 ट्रिलियन** का ऐतिहासिक आंकड़ा छू लिया है, जो अब अमेरिका के बाद दुनिया में दूसरे स्थान पर है। इस तेजी की मुख्य वजह टेक्नोलॉजी और AI सेक्टर में आया उछाल है, लेकिन भारत के लिए इंडेक्स में अपनी हिस्सेदारी बचाए रखना एक चुनौती बन गया है।
टेक्नोलॉजी का दबदबा
इस शानदार विकास के पीछे टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बड़ा हाथ है। MSCI All Country Asia ex-Japan इंडेक्स की कुल कमाई में अब 44% हिस्सा इन्हीं सेक्टरों का है। एक दशक पहले तक, बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर का यहां बोलबाला था, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। फाइनेंशियल सेक्टर की हिस्सेदारी जो पहले 39% हुआ करती थी, अब गिरकर 24% पर आ गई है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है चुनौती?
इस ग्लोबल ट्रेंड के बीच भारत के लिए चिंता की बात यह है कि MSCI इंडेक्स में भारत की हिस्सेदारी 19% से गिरकर अब लगभग 10% रह गई है। विश्लेषकों का मानना है कि सेमीकंडक्टर और हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग जैसे हाई-ग्रोथ सेक्टर में भारत की कम मौजूदगी इसके पीछे का मुख्य कारण है।
जोखिम और भविष्य
भले ही बाजार ने $50 ट्रिलियन का मुकाम हासिल कर लिया है, लेकिन यह तेजी अभी भी कुछ चुनिंदा टेक शेयरों पर टिकी है। बाजार में यह एकाग्रता (concentration) आगे चलकर रिस्क बढ़ा सकती है। इसके अलावा, ग्लोबल स्तर पर हाई इंटरेस्ट रेट्स और जियोपॉलिटिकल तनाव जैसे मैक्रो फैक्टर्स भी मार्केट के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। आने वाले समय में यह देखना होगा कि क्या यह टेक-लेड रैली बाकी सेक्टरों तक भी फैलती है या केवल हार्डवेयर और AI इकोसिस्टम तक ही सीमित रहती है।
