केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw ने भारत की विदेशी तकनीक और कच्चे माल पर निर्भरता कम करने के लिए **25 साल** का एक व्यापक रोडमैप पेश किया है। इस 'थ्री-हॉरिजॉन' प्लानिंग का लक्ष्य सेमीकंडक्टर और केमिकल जैसे अहम सेक्टर में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है।
केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw ने Bloomberg New Economy Forum में एक नई रणनीतिक रूपरेखा पेश की है, जिसका मकसद ग्लोबल सप्लाई चेन में आने वाले झटकों से भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखना है। सरकार ने इसके लिए 3 अलग-अलग समय सीमाएं तय की हैं: शॉर्ट-टर्म (अगले 3-5 साल), मीडियम-टर्म (5-15 साल) और लॉन्ग-टर्म (20-25 साल)।
सेमीकंडक्टर और केमिकल पर फोकस
इस मास्टरप्लान का मुख्य केंद्र 'सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम' है। इसमें जरूरी गैसें, स्पेशलाइज्ड केमिकल्स और रॉ मटेरियल की खरीद के लिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार ने इन क्षेत्रों को 'सिस्टमैटिक वल्नरेबिलिटी' (Systemic Vulnerability) माना है, यानी इन्हें बाहरी देशों पर छोड़ना जोखिम भरा है।
ट्रेड टॉक्स और आर्थिक चुनौतियां
यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड बातचीत में ठहराव आ गया है। वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman और अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि Jamieson Greer के बीच बातचीत में टैरिफ और पॉलिसी मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही है। इस गतिरोध ने सरकार को कूटनीतिक फायदों के बजाय 'आर्थिक सुरक्षा' को प्राथमिकता देने के लिए और अधिक प्रेरित किया है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
अगले 2 दशकों तक टेक्नोलॉजी, स्पेशलिटी केमिकल्स और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों पर सरकार का फोकस रहेगा। भविष्य में इन सेक्टरों को सरकारी इंसेंटिव्स और इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेंडिंग का बड़ा लाभ मिल सकता है। हालांकि, इस पूरे प्लान की सफलता सरकार के क्रियान्वयन (Execution) और प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी पर निर्भर करेगी।
