Arunachal Pradesh ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोरदार खर्च का ऐलान किया है। राज्य में कनेक्टिविटी और पावर सेक्टर को मजबूत करने के लिए **₹11,352 करोड़** का बड़ा बजट आवंटित किया गया है, जिसका असर निर्माण और लॉजिस्टिक कंपनियों पर दिखेगा।
पिछले एक दशक में Arunachal Pradesh की आर्थिक तस्वीर पूरी तरह से बदल गई है। साल 2015-16 में जहां राज्य का कैपिटल एक्सपेंडिचर ₹2,000 करोड़ से भी कम था, वहीं अब 2025-26 में यह बढ़कर ₹11,352 करोड़ के आंकड़े पर पहुंच गया है। यह सरकारी खर्च राज्य की भौगोलिक चुनौतियों को खत्म कर उसे बाकी भारत से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और आंकड़े
सड़क और ऊर्जा क्षेत्र में यह उछाल साफ दिखाई देता है। 2016 से 2026 के बीच नेशनल हाईवे का नेटवर्क 1,000 किमी से बढ़कर लगभग 2,500 किमी हो गया है। इसी तरह, ग्रामीण इलाकों में सड़कों का जाल 4,100 किमी से बढ़कर 14,000 किमी के पार पहुंच गया है, जिससे दूर-दराज के इलाकों में आवाजाही आसान हुई है। पावर सेक्टर की बात करें, तो यहां हाइड्रॉपावर क्षमता 405 MW (2016) से बढ़कर अब 2,270 MW (2026) हो गई है।
रणनीतिक महत्व
यह विकास सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के पास बढ़ रहे तनाव के बीच सड़कों और बिजली की उपलब्धता सैन्य लॉजिस्टिक्स के लिए आधार प्रदान करती है। उत्तर-पूर्वी राज्यों में फंडिंग में 5.2 गुना की वृद्धि हुई है, जो इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए एक रणनीतिक प्राथमिकता है।
निवेशकों के लिए क्या हैं रिस्क?
निर्माण कंपनियों, स्टील और सीमेंट निर्माताओं के लिए यह बड़ी खबर है, लेकिन निवेशकों को कुछ सावधानियां भी बरतनी चाहिए। पहाड़ी इलाकों में काम करना चुनौतीपूर्ण है, जहां मौसम और भूस्खलन के कारण प्रोजेक्ट्स में देरी या लागत बढ़ने (Cost Overrun) का रिस्क बना रहता है। इसके अलावा, पूरा प्रोजेक्ट सरकारी फंडिंग पर टिका है, इसलिए बजट की प्राथमिकताओं में कोई भी बदलाव आने वाले समय में प्रोजेक्ट की गति को प्रभावित कर सकता है।
