Argentina ने अपने फार्मास्युटिकल रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में भारत का स्टेटस अपग्रेड कर दिया है। इस बदलाव से भारतीय दवा निर्यातकों के लिए अर्जेंटीना के बाजार में एंट्री करना काफी सरल हो जाएगा।
रेगुलेटरी बदलाव का फायदा
अर्जेंटीना ने भारत को अपने फार्मास्युटिकल रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में Annex II से हटाकर सीधे Annex I कैटेगरी में शामिल करने का फैसला किया है। ब्यूनस आयर्स में हुई 4th India-Argentina Joint Trade Committee की बैठक में यह निर्णय लिया गया। इससे दवाओं के अप्रूवल में आने वाली लंबी प्रशासनिक रुकावटें खत्म होंगी और भारतीय दवाएं अब साउथ अमेरिकन मार्केट में तेजी से पहुंच सकेंगी।
बढ़ता हुआ ट्रेड और मौका
साल 2025 तक भारत और अर्जेंटीना के बीच द्विपक्षीय व्यापार $6.5 बिलियन के आंकड़े को पार कर चुका है, जिसमें सालाना 17% से ज्यादा की ग्रोथ देखी गई है। अब दोनों देश India-Mercosur Preferential Trade Agreement को भी अपडेट करने पर काम कर रहे हैं ताकि बिजनेस ट्रांजैक्शन की लागत को और कम किया जा सके।
रणनीतिक सहयोग और Lithium प्रोजेक्ट
फार्मा के अलावा, भारत की सरकारी कंपनी Khanij Bidesh India Ltd (KABIL) ने अर्जेंटीना के Catamarca प्रांत में लिथियम एक्सप्लोरेशन के लिए ड्रिलिंग का दूसरा चरण पूरा कर लिया है। भारत के लिए यह प्रोजेक्ट क्रिटिकल मिनरल सप्लाई सुनिश्चित करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
निवेशकों के लिए जोखिम और सावधानी
हालांकि रेगुलेटरी आसानियां एक बड़ा अवसर हैं, लेकिन निवेशकों को अर्जेंटीना और लैटिन अमेरिकी बाजारों में आर्थिक अस्थिरता और लॉजिस्टिक्स लागत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जानकारों का मानना है कि एक्सपोर्टर्स को वहां की प्रतिस्पर्धी बाजार स्थितियों और सप्लाई चेन मैनेजमेंट पर बारीक नजर रखनी होगी, क्योंकि कंपनी के मार्जिन पर असर अंततः इन्हीं फैक्टर्स से तय होगा।
