Andhra Pradesh सरकार के पास अब तक **₹22.6 लाख करोड़** के निवेश प्रस्ताव आए हैं। निवेशकों के लिए असली मुद्दा यह है कि इनमें से कितने प्रोजेक्ट्स जमीन पर उतर रहे हैं, क्योंकि अभी केवल **₹5.8 लाख करोड़** के प्रोजेक्ट्स ही निर्माण के चरण में पहुंचे हैं।
कागजों से हकीकत का सफर
जून 2024 से अब तक राज्य सरकार को 714 निवेश प्रस्ताव मिले हैं। लेकिन फाइनेंशियल मार्केट और एक्सपर्ट्स की नजर इस बात पर है कि इन समझौतों का कन्वर्जन रेट क्या है। अक्टूबर 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, 502 प्रस्तावों को सरकार से मंजूरी मिल चुकी है। इनमें से सिर्फ 257 प्रोजेक्ट्स, यानी कुल ₹5.8 लाख करोड़ का निवेश ही फिलहाल कंस्ट्रक्शन या साइट डेवलपमेंट के स्तर पर है।
सरकार इस निवेश को रफ्तार देने के लिए 'स्पीड ऑफ डूइंग बिजनेस' (Speed of Doing Business) फ्रेमवर्क लागू कर रही है। इसमें एस्क्रो-बेस्ड इंसेंटिव सिस्टम शामिल है, ताकि सरकारी मदद समय पर कंपनियों तक पहुंच सके और प्रोजेक्ट्स जल्दी शुरू हो सकें।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और चुनौतियां
बड़ी संख्या में निवेश का मतलब है कि राज्य के पावर, पानी और लॉजिस्टिक्स जैसे बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ना तय है। अगर सरकार की पब्लिक वर्क्स की रफ्तार प्राइवेट सेक्टर की जरूरतों के साथ मेल नहीं खाती, तो काम अटक सकते हैं।
इसके अलावा, लैंड एक्विजिशन (Land Acquisition) और एनवायरमेंटल क्लीयरेंस जैसे मुद्दे अभी भी निवेशकों के लिए बड़ी रुकावटें हैं। विशाखापत्तनम जैसे हब में निवेश का जमावड़ा तो दिख रहा है, लेकिन वहां की कार्यक्षमता ही इन प्रोजेक्ट्स की सफलता तय करेगी।
अगला बड़ा अपडेट नवंबर 2026 में विशाखापत्तनम में होने वाली CII पार्टनरशिप समिट में देखने को मिलेगा। वहां यह साफ हो पाएगा कि सरकार इन प्रोजेक्ट्स को तेजी से धरातल पर लाने में कितनी कामयाब रही है।
