Amundi CIO का बड़ा दावा: AI का क्रेज कम होते ही भारत लौटेगा विदेशी पैसा

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AuthorNeha Patil|Published at:
Amundi CIO का बड़ा दावा: AI का क्रेज कम होते ही भारत लौटेगा विदेशी पैसा

यूरोप की दिग्गज एसेट मैनेजमेंट कंपनी Amundi के CIO विन्सेंट मोर्टियर का मानना है कि अब विदेशी निवेशक फिर से भारतीय बाजार की ओर रुख करेंगे। अमेरिकी ब्याज दरों में स्थिरता और AI स्टॉक्स के प्रति घटते उत्साह के बीच भारत की मजबूत मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिति निवेशकों के लिए एक बड़ा आकर्षण बन रही है।

दुनिया की सबसे बड़ी एसेट मैनेजर कंपनी में से एक, Amundi के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर विन्सेंट मोर्टियर ने संकेत दिए हैं कि आने वाले महीनों में भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का निवेश बढ़ सकता है। कंपनी, जो भारत में SBI Funds Management Ltd की हिस्सेदार भी है, का मानना है कि विदेशी फंड्स की निकासी का दौर अब खत्म होने की कगार पर है।

क्यों कम हो रहा है AI का आकर्षण?

ग्लोबल मार्केट में पिछले कई महीनों से पैसा मुख्य रूप से अमेरिकी टेक कंपनियों और AI स्टॉक्स में लगा हुआ था। लेकिन अब निवेशक इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहे भारी खर्च का नतीजा मुनाफे के रूप में कब दिखेगा। जैसे-जैसे AI टूल्स की लागत कम हो रही है और वैल्युएशन को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, बड़े निवेशक अब उन बाजारों की तलाश में हैं जिनकी नींव मजबूत है।

भारत की आर्थिक मजबूती (India’s Economic Positioning)

Amundi के मुताबिक, भारत का मैक्रो-इकोनॉमिक ढांचा विदेशी पूंजी के लिए सबसे सुरक्षित दांव है। जहां अमेरिका जैसे विकसित देश $40 ट्रिलियन के कर्ज और ऊंची ब्याज दरों से जूझ रहे हैं, वहीं भारत के वित्तीय आंकड़े—जैसे डेट-टू-जीडीपी रेशियो—कहीं ज्यादा स्थिर और लचीले हैं। मोर्टियर का तर्क है कि जैसे ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती का संकेत देगा, ग्लोबल लिक्विडिटी सुरक्षित और स्थिर बाजारों की ओर बढ़ेगी।

IT सेक्टर पर असर

Amundi का मानना है कि भारतीय IT सेक्टर में अब बदलाव का दौर है। अब वे कंपनियां बेहतर परफॉर्म करेंगी जो AI को अपनी सर्विस का हिस्सा बना चुकी हैं। जो कंपनियां पुराने ढर्रे पर काम करेंगी, उन्हें विकास की राह में कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

सावधानी: निवेशकों को ग्लोबल ब्याज दरों और FPI डेटा पर नजर रखनी चाहिए। इसके अलावा, पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भारत की महंगाई और वित्तीय स्थिरता के लिए एक बड़ा रिस्क बना हुआ है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.