केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने क्रिमिनल केसों को निपटाने के लिए 3 साल की समय सीमा तय की है। साथ ही, उज्जैन में **₹255 करोड़** के मिल्क प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट और फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण पर जोर दिया गया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत के नए क्रिमिनल जस्टिस फ्रेमवर्क की घोषणा की है, जिसका मुख्य उद्देश्य एफआईआर (FIR) से लेकर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले तक की कानूनी प्रक्रिया को 3 साल के भीतर पूरा करना है। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को लागू करने का मुख्य मकसद न्याय प्रणाली में लंबित मामलों को कम करना और तकनीक के जरिए सिस्टम को आधुनिक बनाना है। सरकार अगले 1 साल के भीतर इन सुधारों को पूरी तरह रोल-आउट करने की तैयारी में है।
फॉरेंसिक लैब में बड़ा निवेश
इस आधुनिकीकरण के लिए सरकार ने ₹30,000 करोड़ का भारी-भरकम पूंजीगत खर्च (Capex) करने की योजना बनाई है, जो अगले 5 वर्षों में खर्च किए जाएंगे। इसके तहत पूरे देश में फॉरेंसिक लैब का जाल बिछाया जाएगा। यह कदम सिविल कंस्ट्रक्शन, हाई-टेक लैब इक्विपमेंट और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों के लिए बड़े अवसर लेकर आएगा।
डेयरी सेक्टर और ग्रामीण विकास
भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान सरकार ने डेयरी सेक्टर पर विशेष फोकस किया। उज्जैन में ₹255 करोड़ की लागत से एक नया मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट तैयार किया जाएगा, जिसकी क्षमता 3 लाख लीटर प्रति दिन होगी। KRIBHCO जैसे सहकारी संस्थानों के सहयोग से चलाई जा रही यह परियोजना बिचौलियों को हटाने और कृषि सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
बाजार पर असर
बाजार के नजरिए से देखें तो यह सरकारी खर्च इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और डेयरी उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए स्थिर मांग पैदा कर सकता है। हालांकि, इस पूरे सुधार की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य स्तर पर CCTNS और ICJS जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को कितनी तेजी से लागू किया जाता है और नए इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग कितनी कुशलता से होता है।
