केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने देश की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा विजन पेश किया है। सरकार अब पारंपरिक तरीकों से हटकर अगले **15 से 20 साल** की 'प्रेडिक्टिव सिक्योरिटी' (Predictive Security) रणनीति पर काम करेगी, जिसमें AI और डेटा एनालिटिक्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होगा।
नई दिल्ली में आयोजित 9वें नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रेटजीज (NSS) कॉन्फ्रेंस में गृह मंत्री ने साफ किया कि भारत अब सुरक्षा के मामलों में 'रिएक्टिव' नहीं बल्कि 'प्रिडिक्टिव' मोड में काम करेगा। इसका मकसद किसी भी बड़े खतरे को होने से पहले ही भांप लेना और उसे बेअसर करना है। यह कदम 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा।
टेक्नोलॉजी और AI का संगम
सुरक्षा एजेंसियों को आधुनिक बनाने के लिए Multi Agency Centre, National Intelligence Grid (NATGRID) और National Automated Fingerprint Identification System को आपस में जोड़ा जाएगा। इससे डेटा का एक सीमलेस फ्लो बनेगा। इस बदलाव का सीधा असर टेक कंपनियों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि सरकार अब डेटा मैनेजमेंट, साइबर सिक्योरिटी और स्पेशलाइज्ड सॉफ्टवेयर समाधानों पर भारी खर्च करने की तैयारी में है।
नए आपराधिक कानूनों की समयसीमा
गृह मंत्री ने देश की कानूनी व्यवस्था को बदलने के लिए कड़ा रुख अपनाते हुए भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को पूरी तरह लागू करने के लिए 1 साल की समयसीमा तय की है। इसका लक्ष्य अदालतों में पेंडिंग मामलों को तेजी से निपटाना और कनविक्शन रेट (Conviction Rate) को सुधारना है।
चुनौतियां और भविष्य की राह
हालांकि यह रोडमैप साइबर-वारफेयर, ड्रग्स और घुसपैठ जैसी समस्याओं से निपटने के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है, लेकिन इसकी सफलता इंटर-एजेंसी को-ऑर्डिनेशन और सुरक्षा कर्मियों के स्किल-अपग्रेडेशन पर निर्भर करेगी। इन्वेस्टर्स और मार्केट पर नजर रखने वालों के लिए अब सरकार के नए टेंडर्स और पार्टनरशिप पर ध्यान देना बेहद जरूरी होगा।
