सोने-चांदी के आयात का 'अनुत्पादक' जाल
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, मुकेश अंबानी ने भारत के सालाना भारी सोना और चांदी के आयात पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि यह करीब $75 अरब (जिसमें सोने का $60 अरब और चांदी का $10-15 अरब हिस्सा शामिल है) का आयात देश की बचत को ऐसे रास्तों पर ले जाता है जहाँ से आर्थिक विस्तार को बढ़ावा नहीं मिलता। अंबानी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत ऐतिहासिक रूप से बचत करने वाला देश रहा है, लेकिन इस बचत का एक बड़ा हिस्सा प्रोडक्टिव कैपिटल फॉर्मेशन में परिवर्तित नहीं हो पाता।
यह विचार जियोब्लैकरॉक (JioBlackRock) के साथ एक 'फायरसाइड चैट' के दौरान सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि फिजिकल एसेट्स में धन लगाना, जो बहुत कम रिटर्न देते हैं, एक बड़ा आर्थिक नुकसान है। इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के अनुसार, घरेलू मांग और बढ़ती वैश्विक कीमतों के चलते सोने के आयात में 27.4% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जिसने भारत के ट्रेड डेफिसिट को और बढ़ाया।
जियोब्लैकरॉक के लिए रणनीतिक मोड़
अंबानी के इन बयानों से एक बड़े रणनीतिक बदलाव का संकेत मिलता है। वे भारतीय निवेशकों से अपनी संपत्ति को फिजिकल बुलियन से हटाकर फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स (वित्तीय साधनों) में निवेश करने का आग्रह कर रहे हैं। इसका लक्ष्य निवेशकों को 'सुरक्षित, पारदर्शी और लगातार' रिटर्न देने वाले कैपिटल मार्केट प्रोडक्ट्स में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और ब्लैक रॉक के संयुक्त उद्यम, जियोब्लैकरॉक के लिए यह भारत की विशाल बचत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हासिल करने का एक असाधारण अवसर है। मई 2025 में आधिकारिक तौर पर लॉन्च होने के बाद, जियोब्लैकरॉक अपनी डिजिटल-फर्स्ट अप्रोच और वैश्विक निवेश विशेषज्ञता का उपयोग करके इस परिवर्तन को गति देना चाहता है। कंपनी ने अपने शुरुआती न्यू फंड ऑफर्स (NFOs) में लगभग ₹17,800 करोड़ जुटाए हैं, जो मुख्य रूप से डेट और कैश फंड्स पर केंद्रित हैं। यह पहल इस अनुमान के अनुरूप है कि अगले दशक में भारत की घरेलू सेविंग्स से $9.5 ट्रिलियन का फाइनेंशियल एसेट्स इनफ्लो हो सकता है, क्योंकि लोग फिजिकल एसेट्स से वित्तीय साधनों की ओर बढ़ेंगे।
कैपिटल मार्केट का बढ़ता अवसर और प्रतिस्पर्धा
भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में जबरदस्त वृद्धि देखी गई है, जो मई 2025 तक लगभग ₹72.20 लाख करोड़ और दिसंबर 2025 तक ₹80.23 लाख करोड़ तक पहुंच गई। जियोब्लैकरॉक का लक्ष्य इस बाजार में सेंध लगाना है, वह भी कम टोटल एक्सपेंस रेश्यो (TER) के साथ। वे डायरेक्ट-टू-इन्वेस्टर मॉडल का उपयोग कर रहे हैं, जिससे पारंपरिक मध्यस्थों और उनके कमीशन से बचा जा सके। यह रणनीति उन्हें HDFC, SBI, और ICICI जैसे स्थापित खिलाड़ियों के साथ-साथ Groww और Zerodha जैसे उभरते डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से सीधे प्रतिस्पर्धा में लाती है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज, जो कि पैरेंट ग्रुप है, की मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹19.70 लाख करोड़ है और इसका P/E रेश्यो 22.4 के आसपास बना हुआ है। भारत का पूरा कैपिटल मार्केट सेक्टर, मजबूत IPO मार्केट और बढ़ती डीमैट अकाउंट्स की संख्या के कारण ग्रोथ देख रहा है।
आर्थिक परिदृश्य और भविष्य की राह
भारत की आर्थिक रफ्तार, जिसके 2027 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का अनुमान है, वित्तीयकरण (Financialization) के लिए एक अनुकूल माहौल प्रदान करती है। हालांकि, फिजिकल एसेट्स, जो अभी भी घरेलू बचत का लगभग 70% हिस्सा हैं, से फाइनेंशियल एसेट्स की ओर यह बदलाव एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इक्विटी और म्यूचुअल फंड में निवेश बढ़ा है, लेकिन घरेलू फाइनेंशियल एसेट्स का एक बड़ा हिस्सा अभी भी करेंसी और डिपॉजिट्स ( 56%) में फंसा हुआ है।
इकोनॉमिक सर्वे सोने और चांदी की जटिल भूमिका को रेखांकित करता है; ये लिक्विडिटी तो बढ़ाते हैं, लेकिन ट्रेड में अस्थिरता और आयात पर निर्भरता को भी प्रभावित करते हैं। विश्लेषकों को सरकारी पहलों और तकनीकी प्रगति से प्रेरित होकर कैपिटल मार्केट्स में निरंतर वृद्धि की उम्मीद है। यह दर्शाता है कि अनुत्पादक बुलियन होल्डिंग्स से वित्तीय संपत्तियों की ओर बचत का पुनः-निर्देशन भविष्य के आर्थिक विस्तार और व्यक्तिगत धन संचय का एक प्रमुख उत्प्रेरक है। 2025 में वैश्विक सोने की कीमतों में 65% का उछाल आया, जबकि चांदी 144.4% उछली, जो इन फिजिकल एसेट्स में फंसी बड़ी वैल्यू को और रेखांकित करता है।
