Amazon Business ने साल-दर-साल **65%** की सेल्स ग्रोथ दर्ज की है। छोटे शहरों के बिजनेस में बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी ने साल **2026** के लिए अपना इंफ्रास्ट्रक्चर बजट बढ़ाकर **₹2,800 करोड़** कर दिया है, जो पिछले साल **₹2,000 करोड़** था।
डिजिटल बदलाव की लहर
Amazon Business की सेल्स में आई यह 65% की बढ़त दिखाती है कि भारत के छोटे और मध्यम स्तर के बिजनेस अब ऑनलाइन प्रोक्योरमेंट को तेजी से अपना रहे हैं। कंपनी अपने इस बढ़ते नेटवर्क को सपोर्ट करने के लिए 65 फुलफिलमेंट सेंटर्स के जरिए लॉजिस्टिक्स को मजबूत कर रही है। खास बात यह है कि इस ग्रोथ का बड़ा हिस्सा टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहा है, जो अब कंपनी के कुल बिजनेस का 65% हिस्सा बन चुके हैं। उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल में बल्क ऑर्डर्स में 80% का भारी इजाफा देखा गया है, जिसे मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के बिजनेस चला रहे हैं।
नई टेक्नोलॉजी और सुविधाएँ
कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म पर 20 लाख से ज्यादा सेलर्स को जोड़ा है, जिनमें से 3 लाख पिछले एक साल में ही जुड़े हैं। सेलर्स की इन्वेंट्री और विजिबिलिटी को बेहतर बनाने के लिए कंपनी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर रही है। इसके अलावा, 8 लाख से अधिक बिजनेस कस्टमर 'Buy Now Pay Later' सुविधा का लाभ उठा रहे हैं, जो उनके कैश फ्लो को मैनेज करने में मददगार साबित हो रही है। फिलहाल कुल ऑर्डर्स का 70% मोबाइल के जरिए आ रहा है, जो कंपनी के 'डिजिटल-फर्स्ट' अप्रोच की सफलता को दर्शाता है।
मार्केट की चुनौती और रेगुलेटरी रिस्क
भारतीय B2B ई-कॉमर्स मार्केट में कॉम्पिटिशन काफी बढ़ गया है। Amazon Business को अब Reliance JioMart जैसे दिग्गजों से कड़ी टक्कर मिल रही है। साथ ही, CCI (कंपटीशन कमिशन ऑफ इंडिया) जैसे रेगुलेटर्स की पैनी नजर भी ई-कॉमर्स कंपनियों की गतिविधियों पर बनी रहती है। विदेशी निवेश नियमों (FDI norms) में बदलाव या कोई नया रेगुलेशन कंपनी के फ्यूचर ऑपरेशंस को प्रभावित कर सकता है। निवेशकों के लिए अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी इतने गहरे स्तर पर विस्तार करने के साथ लॉजिस्टिक्स कॉस्ट को कैसे कंट्रोल करती है और AI टूल्स से सेलर्स को कितनी मदद मिलती है।
