आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा है कि RBI के कॉर्पोरेट लोन डेटा के अनुसार, भारतीय कंपनियों का ग्रोथ पर भरोसा कई सालों के उच्चतम स्तर पर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिजनेस ग्लोबल ट्रेड बैरियर्स पर निर्भर रहने के बजाय लोकल कैपेसिटी को प्राथमिकता दे रहे हैं। निवेशक इस कैपिटल एक्सपेंशन स्ट्रेटेजी पर नजर बनाए हुए हैं कि यह ग्रुप की विभिन्न कंपनियों के प्रदर्शन में कैसे तब्दील होती है।
भारतीय बिजनेस में दिख रहा जोरदार निवेश का दम
आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन, कुमार मंगलम बिड़ला ने शुक्रवार को ET World Leaders Forum में कहा कि भारतीय कंपनियां कई सालों में न देखी गई रफ्तार से विस्तार (expansion) के लिए निवेश कर रही हैं। उन्होंने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के बैंक से लिए गए लोन के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कंपनियां विभिन्न सेक्टर्स में नए प्रोजेक्ट्स और कैपेसिटी बढ़ाने के लिए फंड जुटा रही हैं।
लोकल कैपेसिटी पर फोकस, ग्लोबल बैरियर्स नहीं मुख्य वजह
बिड़ला ने इस बात को सिरे से खारिज किया कि मैन्युफैक्चरिंग में निवेश की मुख्य वजह ग्लोबल टैरिफ पॉलिसीज हैं। उनका मानना है कि कंपनियां कहीं ज्यादा सोची-समझी, 'बारीक' (nuanced) रणनीति अपना रही हैं, और ट्रेड बैरियर्स पर निर्भर रहने के बजाय लोकल डिमांड को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने कहा कि एल्युमीनियम जैसे प्रमुख उद्योगों को सिर्फ एक्सपोर्ट पर टैरिफ सुरक्षा के बजाय लोकल फैसिलिटीज की जरूरत है, क्योंकि लंबे समय तक प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए मार्केट एक्सेस और ऑपरेशनल प्रेजेंस बहुत जरूरी है।
निवेशकों के लिए ग्रुप का प्लान
निवेशकों के लिए, ग्रुप की अपनी कैपिटल स्पेंडिंग (capital spending) योजनाएं इस रणनीति की सीधी तस्वीर पेश करती हैं। यह समूह अगले पांच सालों में लगभग $6 बिलियन (लगभग ₹50,000 करोड़) खर्च करने की योजना बना रहा है, जिसमें हिंडाल्को (Hindalco) एल्युमीनियम और कॉपर ऑपरेशंस में इन निवेशों का नेतृत्व करेगी। यह कैपिटल एलोकेशन कोर इंडस्ट्रियल कैपेबिलिटीज को मजबूत करने पर केंद्रित है, जिसे मार्केट एनालिस्ट भविष्य के रेवेन्यू ग्रोथ और ऑपरेशनल स्केल का अंदाजा लगाने के लिए बारीकी से ट्रैक करते हैं।
चुनौतियां और भविष्य की राह
हालांकि, व्यापक निवेश के माहौल में कुछ ऑपरेशनल हकीकतें भी हैं जिन पर शेयरधारक बारीकी से नजर रखते हैं। जहां ग्रुप मेटल्स और सीमेंट में विस्तार कर रहा है, वहीं कुछ यूनिट्स को अलग-अलग चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सीमेंट सेक्टर में, कंपनियां लगातार बढ़ते फ्यूल कॉस्ट और प्रतिस्पर्धी प्राइसिंग स्ट्रेटेजीज से मार्जिन प्रेशर को मैनेज कर रही हैं। इसके अलावा, वोडाफोन आइडिया (Vodafone Idea) के जरिए टेलीकॉम सेक्टर में ग्रुप का एक्सपोजर एक जटिल फैक्टर बना हुआ है, खासकर कंपनी के बड़े डेट ऑब्लिगेशन्स और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के लिए लगातार बड़े कैपिटल स्पेंडिंग की जरूरत को देखते हुए।
बिड़ला ने पिछले दशक में बिजनेस एनवायरनमेंट को बेहतर बनाने में भारत के रेगुलेटरी और डिजिटल रिफॉर्म्स का भी श्रेय दिया, जिससे देश ग्लोबल ग्रोथ के लिए एक आकर्षक डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। जैसे-जैसे आदित्य बिड़ला ग्रुप अपने निवेश चक्र को जारी रखेगा, निवेशकों के लिए मुख्य मॉनिटरेबल्स यह होंगे कि ये बड़े कैपिटल प्रोजेक्ट्स कितनी कुशलता से एग्जीक्यूट होते हैं, कॉस्ट वोलेटिलिटी के बावजूद प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखे जा सकते हैं या नहीं, और आदित्य बिड़ला कैपिटल (Aditya Birla Capital) और ग्रुप के इंफ्रास्ट्रक्चर-हैवी बिजनेसेज जैसी विभिन्न सब्सिडियरीज में डेट लेवल को कैसे मैनेज किया जाता है।
