Adani Group ने कर्नाटक, केरल और बिहार समेत कई गैर-भाजपा शासित राज्यों में ₹5 लाख करोड़ के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का ऐलान किया है। पोर्ट्स, एनर्जी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर केंद्रित इस विस्तार योजना पर निवेशकों की नजरें टिकी हैं।
Adani Group ने एक बड़े विस्तार की रणनीति अपनाते हुए उन राज्यों में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर जोर दिया है, जहां विपक्षी दलों की सरकारें हैं। इस बड़े निवेश पाइपलाइन में ₹5 लाख करोड़ का बजट रखा गया है, जिसमें पोर्ट्स, पावर, रिन्यूएबल एनर्जी और डेटा सेंटर जैसे सेक्टर शामिल हैं। यह कदम राज्य-स्तर की इंफ्रा जरूरतों को पूरा करने के लिए उठाया गया है, चाहे वहां किसी भी दल की सरकार हो।
प्रमुख प्रोजेक्ट्स और रणनीति
इस महत्वाकांक्षी योजना में केरल में Vizhinjam International Seaport, बेंगलुरु में टनल रोड और बिहार में थर्मल पावर प्लांट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। कंपनी का लक्ष्य स्टेबल और लॉन्ग-टर्म रेवेन्यू स्ट्रीम्स हासिल करना है। गौरतलब है कि कंपनी के फ्लैगशिप बिजनेस की 80% अर्निंग्स अब कॉन्ट्रैक्टेड इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स से आती हैं।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
कंपनी के इस कॉन्ट्रैक्टेड बिजनेस मॉडल की ओर झुकाव को निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण 'मॉनिटरेबल' माना जा रहा है। हालांकि, ₹5 लाख करोड़ का बड़ा निवेश फाइनेंशियल रिस्क भी लाता है। मार्केट इस बात पर नजर रख रहा है कि कंपनी अपना कैपिटल स्पेंडिंग और कर्ज के स्तर को कैसे मैनेज करती है।
बीते 3 सितंबर 2026 को Adani Ports और Adani Power के शेयरों में दिखी तेजी संकेत देती है कि संस्थागत निवेशक कंपनी के ऑपरेशनल वॉल्यूम ग्रोथ पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहे हैं। हालांकि, प्रोजेक्ट्स में देरी, लागत बढ़ना और राजनीतिक जटिलताएं अभी भी बड़े रिस्क फैक्टर हैं, जिस पर निवेशकों को सावधानी बरतनी होगी।
