ASSOCHAM का नया मास्टरप्लान: FDI की अब क्वालिटी से होगी परख, वॉल्यूम पर नहीं होगा जोर

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
ASSOCHAM का नया मास्टरप्लान: FDI की अब क्वालिटी से होगी परख, वॉल्यूम पर नहीं होगा जोर

इंडस्ट्री बॉडी ASSOCHAM ने भारत में विदेशी निवेश (FDI) के लिए एक नई 'क्वालिटी-बेस्ड स्कोरिंग सिस्टम' का प्रस्ताव रखा है। अब निवेश की मात्रा के बजाय इस पर फोकस होगा कि वह टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और रोजगार पैदा करने में कितना कारगर है।

भारत में विदेशी निवेश के नजरिए में बड़ा बदलाव आ सकता है। असोचैम (ASSOCHAM) ने सरकार के सामने एक ऐसा फ्रेमवर्क पेश किया है, जहां सिर्फ आने वाले निवेश की कुल रकम (Volume) को ही सफलता का पैमाना नहीं माना जाएगा। इस 'FDI क्वालिटी और इम्पैक्ट फ्रेमवर्क' का मकसद उन प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देना है, जो देश में तकनीक लाने, स्किल डेवलपमेंट और ग्लोबल सप्लाई चेन में मजबूती देने का काम करेंगे।

निवेश के आंकड़ों पर एक नजर

आंकड़े गवाही देते हैं कि भारत का विदेशी निवेश लगातार बढ़ रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में कुल FDI इनफ्लो $95 बिलियन के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, अगर हम सर्विस और सॉफ्टवेयर सेक्टर के कुल FDI की बात करें, तो यह आंकड़ा लगभग $791 बिलियन तक पहुंच चुका है। हालांकि, अब सरकार का फोकस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर है, ताकि देश में सिर्फ असेंबली ही नहीं, बल्कि वैल्यू-एडेड प्रोडक्शन (Value-added production) भी बढ़ सके।

निवेश में आने वाली बाधाएं और नया पोर्टल

ग्लोबल निवेशक अक्सर लंबे डिस्प्यूट और रेगुलेटरी अनिश्चितताओं को लेकर चिंता जताते हैं। इसे दूर करने के लिए, असोचैम ने मौजूदा 'सिंगल-विंडो' सिस्टम की जगह एक 'सिंगल प्रोसेस' पोर्टल बनाने का सुझाव दिया है। इस डिजिटल डैशबोर्ड का लक्ष्य समय-सीमा के अंदर हर अप्रूवल को पूरा करना है।

निवेशकों के लिए क्या है मतलब?

अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो भविष्य में सरकार उन कंपनियों को ज्यादा सपोर्ट देगी जो देश में टेक्नोलॉजी और क्वालिटी जॉब्स लेकर आएंगी। मल्टीनेशनल कंपनियों को भी अब अपनी विस्तार योजनाओं में ऑपरेशनल एफिशिएंसी और स्थानीय अर्थव्यवस्था के साथ लॉन्ग-टर्म जुड़ाव पर ज्यादा जोर देना होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.