सितंबर **2026** में ASSOCHAM Business Confidence Index सालाना आधार पर **8%** बढ़कर **128.25** के स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि सेंटीमेंट पॉजिटिव बना हुआ है, लेकिन ग्लोबल एनर्जी कीमतों और करेंसी में उतार-चढ़ाव के कारण अगस्त के मुकाबले ग्रोथ में मामूली सुस्ती देखी गई है। यह इंडेक्स GST और ऑटो सेल्स जैसे डेटा के जरिए भारतीय इंडस्ट्री की सेहत को ट्रैक करता है।
रिकवरी की रफ्तार में मजबूती
ASSOCHAM (Associated Chambers of Commerce and Industry of India) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में इंडेक्स 128.25 पर पहुंच गया है। यह रिकवरी का ट्रेंड बताता है कि घरेलू इंडस्ट्री ने साल की शुरुआत की तुलना में काफी मजबूती हासिल कर ली है। याद दिला दें कि मई और जून 2026 में यह ग्रोथ रेट महज 2.3% और 2.1% के निचले स्तरों पर थी। चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही में औसत बिजनेस कॉन्फिडेंस में 5.6% की बढ़त दर्ज की गई है, जो कठिन हालातों के बावजूद इंडस्ट्री के संभलने के संकेत हैं।
इंडेक्स कैसे काम करता है?
अप्रैल 2023 को बेस (100) मानकर तैयार किए गए इस ABC Index को करीब दो दर्जन इकोनॉमिक इंडिकेटर्स के आधार पर निकाला जाता है। इसमें GST कलेक्शन, पैसेंजर व्हीकल सेल्स और मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट जैसे हाई-फ्रीक्वेंसी डेटा शामिल हैं। निवेशकों के लिए यह एक 'बैरोमीटर' की तरह है, जिससे क्वार्टरली नतीजों से पहले ही कंज्यूमर डिमांड और प्रोडक्शन की हकीकत का पता चल जाता है।
ग्लोबल दबाव और भविष्य की रणनीति
अगस्त में दर्ज 8.8% की ग्रोथ के मुकाबले सितंबर में यह रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है। इसकी वजह ग्लोबल अनिश्चितताएं हैं—जैसे वेस्ट एशिया में अस्थिरता, एनर्जी प्राइसेज में उतार-चढ़ाव और भारतीय रुपये की गिरती वैल्यू। ये कारण कंपनियों के इनपुट कॉस्ट को बढ़ा रहे हैं, जो प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकते हैं।
निवेशकों को बेहतर डेटा उपलब्ध कराने के लिए, ASSOCHAM ने अपनी रिपोर्टिंग फ्रीक्वेंसी बढ़ाने का फैसला किया है। अब 2026 के बाकी महीनों में यह रिपोर्ट मंथली आएगी और जनवरी 2027 से इसे पाक्षिक (Fortnightly) आधार पर जारी किया जाएगा, जिससे मार्केट ट्रेंड्स को पहले से भांपना आसान हो जाएगा।
