Airline Pilots' Association (ALPA) India ने सरकार से कमर्शियल पायलट्स के लिए टैक्स राहत की मांग की है। अनुभवी पायलट्स के विदेशी एयरलाइंस में जाने से UDAN स्कीम और एविएशन सेक्टर के सामने संकट गहरा गया है।
भारत के एविएशन सेक्टर में इन दिनों अनुभवी पायलट्स की भारी किल्लत महसूस की जा रही है। Airline Pilots' Association (ALPA) India ने इस गंभीर मुद्दे पर सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि गल्फ देशों में मिलने वाली टैक्स-फ्री सैलरी के सामने भारतीय एयरलाइंस टिक नहीं पा रही हैं, जिससे सीनियर पायलट्स की भारी कमी हो रही है।
ट्रेनिंग का भारी खर्च
ALPA India के मुताबिक, एक पायलट को एक्सपर्ट बनाने में ₹1 करोड़ से ₹1.5 करोड़ तक का खर्च आता है और इसके लिए करीब 10 साल का अनुभव चाहिए होता है। जब ये ट्रेंड प्रोफेशनल विदेश चले जाते हैं, तो घरेलू एयरलाइंस को न केवल कीमती टैलेंट गंवाना पड़ता है, बल्कि नए पायलट्स को तैयार करने का समय और पैसा भी खर्च करना पड़ता है।
सरकार के सामने क्या है मांगें?
एसोसिएशन ने मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन को कुछ ठोस सुझाव दिए हैं:
- ट्रांसपोर्ट अलाउंस: इसकी लिमिट को मौजूदा ₹10,000 से बढ़ाकर ₹30,000 प्रति महीना करने की मांग है।
- ड्यूटी-फ्री अलाउंस: विदेश यात्रा से लौटने वाले क्रू मेंबर्स के लिए इसे ₹2,500 से बढ़ाकर ₹15,000 करने का प्रस्ताव है।
इसका मुख्य मकसद यह है कि पायलट्स की 'टेक-होम' सैलरी को बिना एयरलाइंस पर अतिरिक्त बोझ डाले इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के बराबर लाया जा सके।
निवेशकों के लिए क्या है चिंता?
सरकार का UDAN प्रोजेक्ट, जो 80 से ज्यादा नए एयरफील्ड्स को जोड़ने की योजना है, सीधे तौर पर पायलट उपलब्धता पर निर्भर है। अगर यह कमी जारी रही, तो एयरलाइंस का ऑपरेशनल खर्च बढ़ेगा और सेक्टर की ग्रोथ धीमी पड़ सकती है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या वित्त मंत्रालय इन टैक्स छूटों को मंजूरी देता है या एयरलाइंस को बढ़ते वेतन खर्चों से जूझना जारी रखना होगा।
